शैलेंद्र श्रीवास्तव भारतीय रंगमंच, टेलीविजन और फिल्म जगत के बहुप्रतिभाशाली अभिनेता हैं। वे केवल अभिनेता ही नहीं, बल्कि कवि और लेखक भी हैं। उनके अभिनय की सबसे बड़ी विशेषता यह रही...
हिमांशु राज़ बनारस की सुबह और उसकी कचौड़ी काशी में जीवंत रहते मोक्ष का एक अलग ही पर्याय मानी जाती है। जहाँ एक ओर शरीर से मन, और मन से आत्मा की विरक्ति का आध्यात्मिक पक्ष बनारस की...
डॉ श्याम किशोर मिश्रा/ हिमांशु राज 13वीं शताब्दी के सांस्कृतिक परिदृश्य में अमीर खुसरो एक ऐसी हस्ती बनकर उभरे जिनकी रचनाएँ भाषाई प्रयोगों, सूफी भावनाओं और लोकधर्म्यता का अनूठा म...
हिमांशु राज सय्यद मोहम्मद बशीर बद्र का जन्म 15 फरवरी 1935 को अयोध्या (फैजाबाद) में हुआ था और उनका निधन 28 मई 2026 को भोपाल में हुआ। उर्दू ग़ज़ल का वह नरम‑स्वर जो आम बोलचाल की भा...
डॉ श्याम किशोर मिश्र भारतीय सिनेमा के जनक दादासाहेब फाल्के का नाम जिस तरह भारतीय फिल्म इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है, उसी तरह राजा रवि वर्मा का नाम भारतीय दृश्य-संस्कृति...
अमर त्रिपाठी सिनेमा और साहित्य—दोनों मानव अनुभव के अभिव्यक्ति के भिन्न-भिन्न माध्यम हैं, फिर भी उनकी जड़ें सामान्य हैं: कहानी, पात्र, संवेदना और समाज की परतें। आज की तेज़ रफ्तार...
हिमांशु राज़ डॉ. श्याम किशोर मिश्रा एक बहुमुखी व्यक्तित्व के धनी हैं — वे प्रतिष्ठित न्यूरो सर्जन होने के साथ-साथ समर्पित चिकित्सक भी हैं। पर उनकी सबसे विशिष्ट पहचान उनकी साहित्य...
हिमांशु राज़ डॉ. मंजू मंगल प्रभात लोढ़ा केवल एक सामाजिक कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि एक सशक्त साहित्यकार भी हैं। हिंदी साहित्य में उनका हस्ताक्षर अलग और प्रभावशाली है। उनके लेखन में...
हिमांशु राज़/पंकज अवस्थी हिन्दी उपन्यास का वह दौर जब पाठक-समुदाय अभी आकार ले रहा था, तब देवकीनंदन खत्री ने चंद्रकांता और उसकी संतति के जरिए एक नई पाठकीय दुनिया खड़ी कर दी। चंद्रक...
हिमांशु राज़ अमर त्रिपाठी मुंबई के साहित्यिक और पत्रकारिता परिदृश्य में एक स्थापित चेहरे के रूप में जाने जाते हैं. वे पाक्षिक "स्वतंत्र जनसमाचार" के संपादन और प्रबंधन में दशकों स...