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साहित्य संवाद

काशी में सुपुर्द-ए-ख़ाक तहज़ीब की आख़िरी अलामत — उमराव जान अदा

10 Sep 2026

उर्दू अदब में उमराव जान अदा नाम सिर्फ़ एक किरदार नहीं, बल्कि 19वीं सदी की तहज़ीब, मुहब्बत और दर्द की जीवित तस्वीर है। मिर्ज़ा हादी रुस्वा के उपन्यास ने उमराव जान के जीवन की कहान...

दालमण्डी: जहाँ गीत नहीं, आत्मा गाती थी

10 Sep 2026

काशी—भारत की आध्यात्मिक राजधानी, आत्मा का नगर, वह स्थान जहाँ विश्वास जल बनकर बहता है और संस्कृति सुर बनकर गूंजती है। इसे कहा गया ‘गले की बनारस’—क्योंकि यहाँ कला, संगीत और भक्ति...

बनारसी मुजरा: राग, रस और नज़ाकत की परंपरा

10 Sep 2026

बनारस—यह नाम केवल एक नगर नहीं, बल्कि एक जीवंत संगीत-शास्त्र है। यहाँ हर गंगा-लहर में कोई न कोई राग बहता है, हर मंदिर की घंटी किसी अनसुने आलाप का हिस्सा लगती है, और गलियों में बस...

डॉ. शैलेंद्र श्रीवास्तव की कविता में देशभक्ति के विविध रंग

17 Aug 2026

स्वतंत्रता दिवस केवल राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि देश की स्वतंत्रता, एकता और सांस्कृतिक विविधता को स्मरण करने का अवसर भी है। इस अवसर पर अभिनेता, कवि और लेखक डॉ. शैलेंद्र श्रीवास्त...

'हे राम, हाय राम' से चर्चा में डॉ शैलेन्द्र श्रीवास्तव

02 Aug 2026

शैलेंद्र श्रीवास्तव भारतीय रंगमंच, टेलीविजन और फिल्म जगत के बहुप्रतिभाशाली अभिनेता हैं। वे केवल अभिनेता ही नहीं, बल्कि कवि और लेखक भी हैं। उनके अभिनय की सबसे बड़ी विशेषता यह रही...

काशी की कचौड़ी–सब्ज़ी: स्वाद से समाधि तक

12 Jul 2026

हिमांशु राज़ बनारस की सुबह और उसकी कचौड़ी काशी में जीवंत रहते मोक्ष का एक अलग ही पर्याय मानी जाती है। जहाँ एक ओर शरीर से मन, और मन से आत्मा की विरक्ति का आध्यात्मिक पक्ष बनारस की...

अमीर खुसरो: हिंदवी की आवाज़, खड़ी बोली के आदि कवि

25 Jun 2026

डॉ श्याम किशोर मिश्रा/ हिमांशु राज 13वीं शताब्दी के सांस्कृतिक परिदृश्य में अमीर खुसरो एक ऐसी हस्ती बनकर उभरे जिनकी रचनाएँ भाषाई प्रयोगों, सूफी भावनाओं और लोकधर्म्यता का अनूठा म...

उर्दू की अमिट आवाज़: बशीर बद्र का अलविदा

28 May 2026

हिमांशु राज सय्यद मोहम्मद बशीर बद्र का जन्म 15 फरवरी 1935 को अयोध्या (फैजाबाद) में हुआ था और उनका निधन 28 मई 2026 को भोपाल में हुआ। उर्दू ग़ज़ल का वह नरम‑स्वर जो आम बोलचाल की भा...

राजा रवि वर्मा: भारतीय सिनेमा की दृश्य-परंपरा के अग्रदूत

27 May 2026

डॉ श्याम किशोर मिश्र भारतीय सिनेमा के जनक दादासाहेब फाल्के का नाम जिस तरह भारतीय फिल्म इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है, उसी तरह राजा रवि वर्मा का नाम भारतीय दृश्य-संस्कृति...

सिनेमा को साहित्य के पास जाना चाहिए-अमर त्रिपाठी

27 May 2026

अमर त्रिपाठी सिनेमा और साहित्य—दोनों मानव अनुभव के अभिव्यक्ति के भिन्न-भिन्न माध्यम हैं, फिर भी उनकी जड़ें सामान्य हैं: कहानी, पात्र, संवेदना और समाज की परतें। आज की तेज़ रफ्तार...

"हाथ कितने कटे छोड़िए,आप ताजमहल देखिए" -डॉ श्याम किशोर मिश्र

21 May 2026

हिमांशु राज़ डॉ. श्याम किशोर मिश्रा एक बहुमुखी व्यक्तित्व के धनी हैं — वे प्रतिष्ठित न्यूरो सर्जन होने के साथ-साथ समर्पित चिकित्सक भी हैं। पर उनकी सबसे विशिष्ट पहचान उनकी साहित्य...

मंजू लोढ़ा: साहित्य और सेवा की प्रेरणा

19 May 2026

हिमांशु राज़ डॉ. मंजू मंगल प्रभात लोढ़ा केवल एक सामाजिक कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि एक सशक्त साहित्यकार भी हैं। हिंदी साहित्य में उनका हस्ताक्षर अलग और प्रभावशाली है। उनके लेखन में...

देवकीनंदन खत्री: लोककथा से उपन्यास तक का सेतु

16 May 2026

हिमांशु राज़/पंकज अवस्थी हिन्दी उपन्यास का वह दौर जब पाठक-समुदाय अभी आकार ले रहा था, तब देवकीनंदन खत्री ने चंद्रकांता और उसकी संतति के जरिए एक नई पाठकीय दुनिया खड़ी कर दी। चंद्रक...

अमर त्रिपाठी — साहित्य और पत्रकारिता का सुसंपन्न चेहरा

15 May 2026

हिमांशु राज़ अमर त्रिपाठी मुंबई के साहित्यिक और पत्रकारिता परिदृश्य में एक स्थापित चेहरे के रूप में जाने जाते हैं. वे पाक्षिक "स्वतंत्र जनसमाचार" के संपादन और प्रबंधन में दशकों स...