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कोई ऐसे ही 'भाई' नहीं हो जाता

कोई ऐसे ही 'भाई' नहीं हो जाता

मुंबई। अभिनेता और ‘बिग बॉस 20’ के मेजबान सलमान खान ने ‘वीकेंड का वार’ में अपनी उम्र और वजन को लेकर उन्हें ट्रोल करने वालों को करारा जवाब दिया। शो के दौरान सलमान ने कहा कि लोग उन्हें मोटा और बूढ़ा कहकर लगातार टिप्पणी करते हैं। इसके बाद उन्होंने अपना हैट और जैकेट उतार दिया और ट्रोलर्स को चुनौती देते हुए अपनी फिटनेस दिखाई। सलमान का यह अंदाज सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।
सलमान खान का वायरल वीडिओ ‘बिग बॉस 20’ के मंच का है। कार्यक्रम में वह ऑनलाइन ट्रोलिंग और बॉडी शेमिंग के मुद्दे पर बात कर रहे थे। उन्होंने सवाल उठाया कि लोग किसी की उम्र, वजन, चेहरे, परिवार और निजी जीवन को लेकर टिप्पणी करने में संकोच क्यों नहीं करते। सलमान ने ट्रोलर्स से कहा कि दूसरों पर टिप्पणी करने से पहले उन्हें अपने बारे में भी सोचना चाहिए।
60 वर्ष की उम्र में सलमान खान की फिटनेस ने दर्शकों को प्रभावित किया। लंबे समय से फिल्मों में सक्रिय सलमान ने नियमित व्यायाम और अनुशासित जीवनशैली के जरिए खुद को फिट बनाए रखा है। उनकी फिटनेस को देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि उम्र केवल संख्या है, बशर्ते व्यक्ति अपने स्वास्थ्य को लेकर जागरूक और गंभीर रहे। हालांकि फिटनेस का अर्थ केवल मांसपेशियां बनाना या सिक्स पैक दिखाना नहीं है। स्वस्थ रहने के लिए नियमित व्यायाम, संतुलित खान-पान और सक्रिय जीवनशैली जरूरी है।
सलमान खान का संदेश केवल ट्रोलर्स को जवाब देने तक सीमित नहीं था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के शरीर और उम्र को लेकर मजाक बनाना उचित नहीं है। सोशल मीडिया के दौर में लोग बिना पूरी जानकारी के किसी के बारे में टिप्पणी कर देते हैं। कई बार ऐसी टिप्पणियां मानसिक दबाव और अपमान का कारण बनती हैं। सलमान का विरोध इसी नकारात्मक प्रवृत्ति के खिलाफ था।
प्रशंसक सलमान खान को प्यार से ‘भाई’ कहते हैं। यह संबोधन केवल उनकी फिल्मों, संवादों और दबंग अंदाज के कारण लोकप्रिय नहीं हुआ, बल्कि जरूरतमंदों की मदद करने की उनकी छवि ने भी इसे मजबूत किया है। बीइंग ह्यूमन फाउंडेशन की स्थापना 2007 में हुई थी। संस्था शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में वंचित लोगों के लिए काम करती है। इसके माध्यम से जरूरतमंदों को चिकित्सा सहायता, शिक्षा और रोजगार से जुड़े सहयोग देने का प्रयास किया जाता है।
कैंसर पीड़ित बच्चों की मदद के मामले में भी सलमान खान का नाम सामने आता रहा है। इलाज का खर्च उठाना, अस्पतालों में मरीजों से मिलना और उनका मनोबल बढ़ाना उनके समाजसेवी कार्यों का हिस्सा रहा है। कैंसर कार्यकर्ता विजी वेंकटेश के अनुसार, सलमान ने कई बच्चों के इलाज में मदद की और उन्हें बीमारी से लड़ने के लिए प्रोत्साहित किया। एक 12 वर्षीय बच्ची को कीमोथेरेपी पूरी करने के लिए प्रेरित करने का प्रसंग भी सामने आया है।
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में मरीज के साथ पूरा परिवार आर्थिक और मानसिक संकट से गुजरता है। ऐसे समय में इलाज के लिए आर्थिक सहयोग महत्वपूर्ण होता है, लेकिन मरीज को भावनात्मक सहारा देना भी कम जरूरी नहीं है। सलमान खान द्वारा मरीजों और उनके परिवारों से व्यक्तिगत रूप से मिलना इसी संवेदनशीलता को दर्शाता है। कैंसर से उबर चुके बच्चों से उनकी मुलाकात की खबरें भी सामने आती रही हैं।
सलमान खान और उनके परिवार की ओर से जरूरतमंद मरीजों को चिकित्सा सहायता दिए जाने की खबरें भी आती रही हैं। कुछ मामलों में मरीजों के दस्तावेज और उपचार संबंधी जानकारी की जांच के बाद सहायता अस्पतालों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि आर्थिक सहयोग का उपयोग उपचार के लिए हो।
सलमान खान ने फिल्म उद्योग में नए कलाकारों को अवसर देने का काम भी किया है। हीरो के माध्यम से अथिया शेट्टी और सूरज पंचोली को मौका मिला। नोटबुक में जहीर इकबाल और प्रनूतन बहल को लॉन्च किया गया। वहीं लवयात्री के जरिए आयुष शर्मा और वरीना हुसैन ने फिल्मी दुनिया में कदम रखा।
किसी नए कलाकार को फिल्म में अवसर मिलना उसके सफल करियर की गारंटी नहीं होता, लेकिन यह उसके लिए पहला महत्वपूर्ण मंच जरूर बनता है। फिल्म उद्योग में प्रतिभा के साथ पहचान, मार्गदर्शन और अवसर की भी जरूरत होती है। सलमान खान ने कई अवसरों पर कहा है कि वह हर व्यक्ति को नहीं, बल्कि योग्य और मेहनती कलाकारों को मौका देने में विश्वास रखते हैं।
सलमान खान की लोकप्रियता का दायरा बहुत बड़ा है। उनके कपड़े, संवाद, फिटनेस और फिल्मों से जुड़ी खबरें कुछ ही समय में लाखों लोगों तक पहुंच जाती हैं। ऐसे में जब वह स्वास्थ्य, माता-पिता की देखभाल, कैंसर मरीजों की मदद और जरूरतमंदों के साथ खड़े होने का संदेश देते हैं, तो उसका प्रभाव मनोरंजन से कहीं आगे जाता है।
‘बिग बॉस’ के मंच पर ट्रोलर्स को जवाब देते हुए अपनी फिटनेस दिखाना सलमान खान के बेबाक अंदाज का उदाहरण है। उन्होंने यह दिखाया कि उम्र बढ़ना किसी व्यक्ति की पहचान या क्षमता को समाप्त नहीं करता। 60 वर्ष की उम्र में भी उनकी फिटनेस निश्चित रूप से प्रेरणादायक है, लेकिन उनकी वास्तविक ताकत केवल शरीर में नहीं, बल्कि दूसरों की सहायता करने की भावना में दिखाई देती है।
किसी बीमार बच्चे का इलाज कराना, कैंसर पीड़ित परिवार का सहारा बनना और नए कलाकारों को पहला अवसर देना ऐसे काम हैं, जो किसी भी लोकप्रिय व्यक्ति की जिम्मेदारी को बड़ा बनाते हैं। सलमान खान की छवि में अभिनेता, मेजबान, फिटनेस प्रेरणा और समाजसेवी—ये सभी रूप साथ दिखाई देते हैं।
इसीलिए सलमान खान को ‘भाई’ कहना केवल प्रशंसकों का भावनात्मक संबोधन नहीं है। यह उस भरोसे का भी प्रतीक है, जो उनके प्रशंसकों ने उनके व्यक्तित्व और मददगार स्वभाव से जोड़ा है। ऐसे ही कोई भाई नहीं हो जाता। भाई बनने के लिए लोगों के सुख-दुख में खड़ा होना पड़ता है।