अभिनेत्री गीता बसरा ने धनतेरस पर ज्वेलरी खरीदने की अपनी खास परंपरा बताई है। गीता ने कहा कि वे आमतौर पर ज्वेलरी खरीदने में खास दिलचस्पी नहीं रखतीं, लेकिन धनतेरस के दिन अपने लिए कोई गहना जरूर खरीदती हैं। उन्होंने कहा, “मैं ज्वेलरी की शौकीन नहीं हूं, लेकिन अगर कुछ खरीदना हो तो वह हमेशा धनतेरस पर ही खरीदती हूं।” पिछले साल उन्होंने अपने लिए मंगलसूत्र खरीदा था, जबकि उससे पहले के साल हीरे और सोने का एक पतला हार खरीदा था। गीता को ऐसे गहने पसंद हैं जिन्हें वे रोज भी पहन सकें।
गीता ने मजाक में कहा कि उनके पति, पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह, ज्वेलरी के बारे में बहुत कम जानते हैं। इसलिए वे अपनी ज्वेलरी खुद चुनती हैं। उनके लिए धनतेरस सिर्फ खरीदारी का दिन नहीं, बल्कि दीपावली के उत्सव की शुरुआत भी है।
गीता और हरभजन के लिए यह त्योहार उनकी शादी के बाद जालंधर में मनाई गई पहली दीपावली की यादें भी ताजा कर देता है। गीता ने बताया कि शादी के कुछ दिन बाद ही पूरा परिवार एक साथ त्योहार मनाने जुटा था। घर सजा हुआ था, खाना बना था, ढोल बज रहे थे और दोस्त नाच-गाकर खुशी मना रहे थे। उन्होंने इसे अपनी जिंदगी की सबसे खूबसूरत दीपावलियों में से एक बताया।
इंग्लैंड में पली-बढ़ी गीता के लिए दीपावली की तैयारियां पहले थोड़ी सीमित रहती थीं। उन्होंने बचपन की यादों को अपने घर में पूजा की परंपरा जोड़कर संजोया है। वहीं, हरभजन के परिवार में गुरुद्वारे में पहला दीपक जलाने की परंपरा है। दोनों अपनी-अपनी संस्कृतियों को मिलाकर त्योहार मनाने की कोशिश करते हैं।
गीता ने हंसते हुए बताया कि वे तैयार होने में सिर्फ 10 मिनट लेती हैं, जबकि हरभजन को तैयार होने में काफी समय लगता है। वे जल्दी तैयार होकर घर की सजावट और त्योहार की तैयारियां संभालती हैं, जबकि हरभजन अपने अंदाज में तैयार होते हैं।
हरभजन सिंह ने अपने परिवार की कुछ खास दीपावली परंपराओं के बारे में बताया। उनके अनुसार, उस दिन घर में पकौड़े बनाए जाते हैं और सरसों के तेल का दीया जलाना खास माना जाता है। दीये पर चाकू रखना और आंखों में काजल लगाना भी बुरी नजर से बचने के लिए किए जाते हैं। हरभजन ने कहा कि ये छोटी-छोटी परंपराएं ही त्योहार को खास बनाती हैं।
क्रिकेट टूर के दौरान परिवार से दूर रहने की यादें भी हरभजन ने साझा कीं। उन्होंने बताया कि टीम के साथ अहमदाबाद में मैच जीतने और शतक लगने के बाद मनाई गई दीपावली यादगार रही। टीम के साथियों को उन्होंने परिवार जैसा बताया और कहा कि वे भारतीय रेस्टोरेंट में साथ बैठकर त्योहार मनाते थे।
गीता और हरभजन चाहते हैं कि उनके बच्चे त्योहारों के पीछे का मतलब और परंपराएं समझें। हरभजन ने कहा, “अगर बच्चे इसे देखेंगे नहीं, तो सीखेंगे नहीं। हमें उन्हें पूजा के लिए साथ बैठाना होगा ताकि वे समझें कि हम यह सब क्यों करते हैं। यह हमारी परंपरा और संस्कृति है, जिसे हमें भूलना नहीं है।”
त्योहार के दौरान असली धन की बात करते हुए गीता ने कहा कि उनके लिए परिवार, बच्चे, पति, माता-पिता, स्वास्थ्य और घर सबसे बड़ी दौलत हैं। उनके अनुसार, बाकी सब चीजें भौतिक और गौण हैं।
