शैलेंद्र श्रीवास्तव भारतीय रंगमंच, टेलीविजन और फिल्म जगत के बहुप्रतिभाशाली अभिनेता हैं। वे केवल अभिनेता ही नहीं, बल्कि कवि और लेखक भी हैं। उनके अभिनय की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि उन्होंने चरित्र और नकारात्मक भूमिकाओं को भी प्रभावशाली अंदाज़ में निभाया। थिएटर से अपने करियर की शुरुआत करने वाले डॉ शैलेन्द्र ने लंबे समय तक मंच पर काम करने के बाद फिल्म और टीवी की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्हें “द स्पेस सिटी सिग्मा” जैसी शुरुआती प्रस्तुति में यादगार भूमिका के लिए जाना जाता है। इसके बाद उन्होंने “रक्त चरित्र”, “गदर”, “पान सिंह तोमर”, “सी.आई.डी.” और कई अन्य लोकप्रिय फिल्मों व धारावाहिकों में अभिनय किया। उनकी साहित्यिक रुचि और बहुभाषी व्यक्तित्व उन्हें एक साधारण कलाकार से अलग बनाता है। वे ऐसे कलाकार हैं जिन्होंने अभिनय, कविता और लेखन—तीनों क्षेत्रों में सम्मान अर्जित किया है। मौजूदा स्थिति पर प्रहार करती उनके द्वारा रचित एक कृति "हे राम, हाय राम'आपके सम्मुख प्रेषित है :
“हे राम‼️हाय राम ‼️”
हे राम!!!
सब देख रहे हो सब सुन रहे हो
सब समझ भी रहे हो फिर भी तत्काल…
कोई समाधान नहीं कर रहे हो!!!
कोई निराकरण नहीं कर रहे हो!!!
यत्र तत्र सर्वत्र हो कण-कण में व्याप्त हो
फिर भी…हे राम!!!
दर्शक बने देख रहे हो…सर्वत्र व्याप्त…
भ्रष्टाचार, पापाचार दुराचार, अत्याचार
अनाचार, कदाचार मिथ्याचार, लूटाचार
अयोध्या धाम हो या बद्रीनाथ धाम
बुटाटी धाम हो या कुछ अन्य धाम
हे राम!!!
हाय राम!!! हाय, हाय, हाय
क्या क्या दिखा रहे हो? कुछ स्मरण है?
तुम्हारी अपनी अयोध्या श्रीहीन थी, दीनहीन थी
अरे…तुम्हें अपना जन्म स्थान ही
बड़ी कठिनाई से प्राप्त हुआ…
पाँच सौ वर्षों के पश्चात सनातनी संघर्ष के पश्चात
सर्वोच्च न्यायालय आदेश के पश्चात
हे राम !!! कुछ स्मरण है
ये साँसारिक ऐश्वर्य तुम्हारा है फिर भी टाट में पड़े थे
आज थाट में पड़े हो न्यायालय में…
राजनैतिक दलों ने शपथ पत्र डालकर
तुम्हारे अस्तित्व पर ही प्रश्न चिह्न लगा दिया था
तुम्हें नकार दिया था जन्मभूमि विवाद को
एक लम्बे कालखण्ड तक अटका दिया था, लटका दिया था
जनमानस को भटका दिया था तुम्हें काल्पनिक बता दिया था
रामचरित मानस फाड़ दिया था उसके पृष्ठों को जला दिया था
हे राम!!! तुम्हारे मंदिर का निर्माण हो
अयोध्या पुनः धाम हो इस पावन उद्देश्य से
सनातनी राम भक्तों ने दीर्घकालीन संघर्ष किया था
सर्वोच्च बलिदान दिया था तत्कालीन शासकों ने
निहत्थे राम भक्तों पर गोलियाँ तक चलवाईं थीं
सरयू को रक्तरंजित किया था परिजनों ने प्रियजनों को खोया था
देश ने राम भक्तों को खोया था येन केन प्रकारेण
सर्वोच्च न्यायालय में तथ्यों, तर्कों की कसौटी पर
पूर्णरूपेण खरा उतरकर मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ
भव्य मंदिर का निर्माण हुआ अयोध्या पुनः
समृद्ध, वैभवशाली हुई सजी सँवरी, निहाल हुई
भक्तों का जनसमुदाय अयोध्या धाम में उमड़ पड़ा
क्षमतानुसार सबने…तुम्हारे दान पात्रों को भर दिया
स्वर्ण, चाँदी, रत्नों से भर दिया, हे राम!!!
तुम अपने कुछ भ्रष्ट सेवकों की…धृष्टता तो देखो
निर्भयता, निर्लज्जता तो देखो उदंडता की पराकाष्ठा तो देखो
इन रामद्रोहियों ने…श्रद्धापूर्ण भक्तों के चढ़ावे को
आँखों से काजल की भाँति चुरा लिया
तुम्हारे दान पात्र से चुरा लिया और इस लूट संपत्ति की
बंदरबाँट कर…बनवाने लगे अट्टालिकाएँ
क्रय करने लगे भूमि, आभूषण क्रय करने लगे वाहन
किया शेयर बाज़ार में निवेश परिवर्तित हुआ उनका वेश
लूट से बने ये नवधनाढ्य पकड़े भी गए
पृथ्वी पर अवश्य ही न्यायालय दण्ड देगी
तुम्हारे धाम में…तुम्हारी न्यायालय दण्ड देगी
हे राम!!!एक चमत्कार तुमने उत्कृष्ट दिखाया
नास्तिकों को तत्काल आस्तिक बनाया
जो तुम्हारे अस्तित्व को नकारते थे अयोध्या तुम्हारी है, नहीं मानते थे
आज वो सब…तुम्हारे भक्त हो गए हैं
सनातनी हिंदू हो गए हैं कालनेमि स्वाँग रच रहे हैं
आज वो कहते हैं-राम हैं सर्व शक्तिमान
राम चरित मानस है-सांस्कृतिक संविधान
इन्हें देख गिरगिट भी शर्मा गए हैं ये ढोंगीं राम भक्त कहाँ से आ गए हैं?
हे राम!!! इस संसार में इस ब्रह्मांड में
पृथ्वी आकाश में कण कण में
तुम सदा थे, हो और रहोगे अपने सभी विरोधियों के विरुद्ध
तुमने अपना अस्तित्व किया है सिद्ध सनातनी अपने चिर अस्तित्व तक
अनन्त-अनन्त काल तक ये संसार ये सृष्टि जब तक है तबतक
श्रद्धा से कहते रहेंगे,राम नाम सत्य है
राम नाम सत्य है राम नाम सत्य है
- डॉ.शैलेन्द्र श्रीवास्तव