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पिता को समर्पित है 'हुंकार' का आखिरी सीन, निर्देशक करण का छलका दर्द

पिता को समर्पित है 'हुंकार' का आखिरी सीन, निर्देशक करण का छलका दर्द

करण डी. कपाड़िया और नित्या मेहरा की वेब सीरीज 'हुंकार: द रोर' 25 सितंबर से स्ट्रीमिंग के बाद से लगातार चर्चा में है। दमदार कहानी के साथ-साथ इस सीरीज ने अपने शानदार कलाकारों - अनीत पड्डा, फातिमा सना शेख, रघुबीर यादव, मोहम्मद जीशान अय्यूब और अर्जुन माथुर की वजह से दर्शकों के दिल में खास जगह बनाई है।

सीरीज के लाइमलाइट में आने के बाद निर्देशक करण डी. कपाड़िया ने इसके बनने की कहानी और कलाकारों के जुड़ने का किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि कैसे एक छोटे से सीन ने बड़े कलाकारों को इस प्रोजेक्ट से जोड़ दिया।

कपाड़िया के मुताबिक, एक एपिसोड के अंत में अनीत पड्डा का किरदार मीनू रावत ट्रायल के बीच सड़क पर गोलगप्पे खाने जाती है। उसे अंदाजा नहीं होता कि उसकी यह आम सी हरकत ऑनलाइन ट्रोलिंग और उसके चरित्र पर सवालों की वजह बन जाएगी। "मोहम्मद जीशान अय्यूब ने सिर्फ वही गोलगप्पे वाला सीन पढ़ा और तुरंत हाँ कह दी। उन्होंने कहा था कि आज के दौर में कोई इस तरह का सिनेमा और इस तरह की कहानी नहीं कह रहा है," करण ने बताया।

फातिमा सना शेख पर बात करते हुए करण ने कहा, "मैं दंगल से ही उनका फैन रहा हूँ। वह एक बेहतरीन अभिनेत्री हैं और किरदार के लिए गहरी रिसर्च करती हैं। इस रोल के लिए उन्होंने कई महिला पुलिस अधिकारियों के साथ समय बिताया ताकि उस फौलादी जज्बे और संयम को पर्दे पर ला सकें जो इस किरदार को चाहिए था।"

रघुबीर यादव के बारे में उन्होंने कहा कि पंचायत के प्रधान जी के बाद 'हुंकार' में बापजी के रूप में वह फिर छा गए हैं। "वह हमारे सबसे बड़े और प्रयोगधर्मी अभिनेताओं में से एक हैं। वह ऐसा किरदार निभाने को लेकर बेहद उत्साहित थे जो उन्होंने पहले कभी नहीं किया था।"

अर्जुन माथुर जो शो में प्राइम-टाइम एंकर बने हैं, उनके बारे में करण ने कहा, "भारतीय मीडिया के पेचीदा माहौल में अर्जुन को रखना एक चुनौती थी, लेकिन वह शो में आलोचना और संतुलन की आवाज बनकर उभरे हैं।"

सीरीज के आखिरी एपिसोड में जीशान और फातिमा के बीच अपने पिताओं को लेकर एक बेहद निजी बातचीत है। करण ने कहा, "यह सीन बहुत पर्सनल है। मैंने इसे अपने माता-पिता के साथ अपने रिश्ते को ध्यान में रखकर लिखा है। हम सब अपने माता-पिता के ट्रॉमा की ही उपज होते हैं और पूरी जिंदगी उससे उबरने की कोशिश करते हैं। यह सीन फादर फिगर्स के जश्न जैसा है।"