नेशनल अवॉर्ड विनर मनोज बाजपेयी पहली बार एक ग्रिपिंग ड्रामा में महात्मा गांधी का रोल निभाने जा रहे हैं। यह फिल्म भारत की आजादी के इतिहास के एक कम जाने-पहचाने 21 दिनों के चैप्टर का खुलासा करती है, जिसे सुधीर मिश्रा डायरेक्ट कर रहे हैं और अनुभव सिन्हा अपने बैनर बनारस मीडिया वर्क्स के तले प्रोड्यूस कर रहे हैं।_
पिछले एक दशक में अनुभव सिन्हा ने खुद को इंडियन सिनेमा के सबसे वर्सेटाइल क्रिएटिव लोगों में से एक के तौर पर स्थापित किया है। मुल्क, आर्टिकल 15 और थप्पड़ जैसी दमदार और सोचने पर मजबूर करने वाली फिल्मों के जरिए उन्होंने लगातार बड़े पर्दे पर जरूरी मुद्दों को उठाया है और कहानी कहने के नए बेंचमार्क सेट किए हैं। अपनी फिल्मों के अलावा अनुभव सिन्हा ने प्रोड्यूसर के तौर पर भी इंडस्ट्री की अलग-अलग आवाजों को सपोर्ट किया है और ईमानदारी व दमदार सिनेमाई अंदाज के साथ कई खास कहानियों को दर्शकों तक पहुंचाया है।
अब उनका अगला प्रोजेक्ट एक नई और खास शुरुआत करने जा रहा है, क्योंकि वह दिग्गज फिल्ममेकर सुधीर मिश्रा की अगली डायरेक्टोरियल फिल्म को प्रोड्यूस कर रहे हैं। सुधीर मिश्रा हिंदी सिनेमा में अपने 40 साल पूरे करने के करीब हैं। हजारों ख्वाहिशें ऐसी, धारावी और इस रात की सुबह नहीं जैसी मॉडर्न क्लासिक्स से सजी उनकी शानदार जर्नी को देखते हुए यह प्रोजेक्ट बेहद खास है। इंडस्ट्री के बेहतरीन और सबसे सम्मानित डायरेक्टर्स में गिने जाने वाले सुधीर मिश्रा इस फिल्म में तीन नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स का अनुभव भी लेकर आ रहे हैं। उन्हें ये वो मंजिल तो नहीं के लिए बेस्ट डेब्यू फिल्म ऑफ अ डायरेक्टर, धारावी के लिए बेस्ट फीचर फिल्म इन हिंदी और मैं जिंदा हूं के लिए बेस्ट फिल्म ऑन अदर सोशल इश्यूज का नेशनल अवॉर्ड मिल चुका है। यह फिल्म लंबे समय बाद उनकी थिएट्रिकल रिलीज के साथ बड़े पर्दे पर वापसी भी होगी। अब दोनों फिल्ममेकर अपनी-अपनी खास क्रिएटिव सोच को साथ लेकर भारत की आजादी के दौर की असली घटनाओं से जुड़ी एक कहानी दर्शकों के सामने लाने जा रहे हैं।

इस कहानी को और खास बनाते हैं कई बार नेशनल अवॉर्ड जीत चुके एक्टर मनोज बाजपेयी, जिन्हें आज के दौर के बेहतरीन एक्टर्स में गिना जाता है। अपने करियर में पहली बार मनोज बाजपेयी महात्मा गांधी के आइकॉनिक किरदार में नजर आएंगे। वह अपनी खास इंटेंसिटी और बारीक एक्टिंग के साथ गांधी के एक बेहद मानवीय रूप को पर्दे पर पेश करेंगे। फिल्म की दमदार कास्ट में शानदार एक्टर सौरभ शुक्ला भी शामिल हैं, जो इस ऐतिहासिक दौर को पर्दे पर जीवंत करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
फिल्म की कहानी के पीछे के आइडिया के बारे में डायरेक्टर सुधीर मिश्रा ने बताया, “यह नई फिल्म इतिहास के एक अहम लेकिन कम चर्चित हिस्से पर फोकस करती है भारत की आजादी के दौरान महात्मा गांधी की जिंदगी के 21 दिन। उस समय जब देश आजादी की ओर बढ़ रहा था और दिल्ली सत्ता का केंद्र बन रही थी, गांधी ने एक ऐसा फैसला लिया जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी उन्होंने वहां से दूर जाने का फैसला किया। लेकिन वहां से दूर जाना उनके लिए पीछे हटना नहीं था। उन्होंने खुद को एक नए रूप में ढाला। इतिहास की किताबें उस दौर की ऊपर-ऊपर की घटनाओं के बारे में बताती हैं, लेकिन यह कहानी उस मशहूर फैसले के पीछे की असली वजह और गांधी की उस निजी यात्रा को दिखाएगी, जिसमें वह खुद अपने रास्ते को एक नए तरीके से तय कर रहे थे।”
दो दिग्गज फिल्ममेकर्स के साथ आने और दमदार कलाकारों की शानदार कास्ट के चलते यह फिल्म एक खास सिनेमाई अनुभव बनने के लिए तैयार है। भारत की आजादी के बड़े दौर को एक बेहद निजी और मानवीय कहानी के साथ जोड़ते हुए यह महत्वाकांक्षी फिल्म दर्शकों को भारतीय स्वतंत्रता के इतिहास के उस अध्याय को एक नए, करीब से और भावुक नजरिए से देखने का मौका देगी, जिसके बारे में उन्हें लगता है कि वे पहले से सब जानते हैं।
फिल्म का निर्देशन सुधीर मिश्रा कर रहे हैं और इसमें मनोज बाजपेयी और सौरभ शुक्ला अहम किरदारों में नजर आएंगे। फिल्म को अनुभव सिन्हा और नरेंद्र हिरावत ने प्रोड्यूस किया है। यह बेनारस मीडिया वर्क्स प्रोडक्शन है और इसे एनएच स्टूडियोज पेश कर रहा है।