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अभिषेक बच्चन: खेलों में दूसरी विरासत बना रहे हैं

अभिषेक बच्चन: खेलों में दूसरी विरासत बना रहे हैं

अभिषेक बच्चन अब सिर्फ बॉलीवुड के खानदान के सदस्य नहीं रहे। पिछले दस साल में उन्होंने खेलों में अपनी अलग पहचान बनाने पर ध्यान दिया है। हाल ही में पीडब्लूसी इंडिया के चेयरपर्सन संजीव कृष्ण से हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि उनके लिए खेल केवल व्यवसाय नहीं है, बल्कि यह एक इच्छा और जिम्मेदारी भी है।
बचपन से ही उनके पिता अमिताभ बच्चन ने उन्हें खेलों का शौक सिखाया। घर के बाग़ में कबड्डी के खेल से लेकर मोहम्मद अली, पेले जैसे महान खिलाड़ियों की कहानियाँ—यह सब उनके साथ रहा। उनकी खेलों से जुड़ाव अचानक नहीं हुआ, बल्कि धीरे-धीरे गहरा होता गया।
उनकी शुरुआत जयपुर पिंक पैंथर्स से हुई, जहाँ वे टीम के साथ जी-जान से जुड़े। मैच के पहले वे खिलाड़ियों के साथ अभ्यास करते, उनके आहार पर ध्यान देते और छोटी-छोटी व्यवस्थाओं में भी मदद करते। यही लगन उन्होंने चेन्नईयन एफसी और अब यूरोपियन टी20 प्रीमियर लीग में भी दिखाई। उनका मानना है कि यूरोप क्रिकेट के लिए आखिरी बड़ा बाजार है और वहां लीग बनाना एक बड़ा काम है।
अभिषेक कहते हैं कि फिल्म देखने वाले दर्शक और खेल के प्रशंसक अलग होते हैं। खेल के प्रशंसक अधिक निष्ठावान और प्रतिबद्ध होते हैं। इसलिए उनके लिए दीर्घकालिक सोच जरूरी है। वे सिर्फ पैसा लगाकर पीछे हटने वाले मालिक नहीं हैं; वे अपनी पूँजी पहले लगाते हैं और साथियों को भी दीर्घकालिक सोच रखने वाले चुनते हैं। उनका मकसद साफ है: सिर्फ चेक साइन करना नहीं, बल्कि ऐसा कुछ बनाना जो लंबे समय तक टिके। इस तरह अभिषेक बच्चन ने दूसरी विरासत धीरे-धीरे और पूरी निष्ठा से बनाई है।