अक्षय ओबेरॉय को ऐसे किरदार निभाना पसंद है, जिनमें अच्छाई और बुराई दोनों नज़र आती हैं। पारंपरिक हीरो की भूमिकाओं तक सीमित रहने के बजाय, अभिनेता ने ‘गुड़गांव’, ‘फ्लेश’, ‘थार’ और ‘टोनी’ जैसे प्रोजेक्ट्स में कई जटिल किरदार निभाए हैं। अब ‘गजब रात’ के साथ वह एक बार फिर ऐसे किरदार में नज़र आएंगे, जो उन्हें अपनी अभिनय क्षमता को नए तरीके से दिखाने और इंसानी व्यवहार के अलग-अलग पहलुओं को समझने का मौका देता है।
अक्षय के लिए नकारात्मक और सही-गलत के बीच उलझे किरदार निभाना एक अलग तरह की रचनात्मक आज़ादी देता है। ऐसे किरदार अक्सर कई तरह की भावनाओं, अलग सोच और अचानक लिए गए फैसलों से प्रभावित होते हैं। इनके ज़रिए एक अभिनेता सामान्य किरदारों से आगे बढ़कर ऐसी शख्सियतों को समझ सकता है, जिन्हें पूरी तरह अच्छा या बुरा नहीं कहा जा सकता। अक्षय को ऐसे किरदार निभाने में सबसे ज्यादा दिलचस्पी इसी जटिलता के कारण होती है।

ऐसे किरदारों को निभाने में अपनी दिलचस्पी के बारे में बात करते हुए अक्षय ओबेरॉय कहते हैं, “मुझे ऐसे किरदारों की सबसे खास बात यह लगती है कि वे खुद को अपनी कहानी में कभी विलेन नहीं मानते। हर इंसान के पास अपने काम करने की कोई न कोई वजह होती है। एक अभिनेता के तौर पर उस सोच को समझना और पर्दे पर दिखाना मेरे लिए बहुत दिलचस्प होता है। ऐसे किरदार मुझे अलग-अलग भावनाओं, आपस में टकराती सोच और ऐसे अनोखे गुणों को दिखाने का मौका देते हैं, जो शायद किसी आम हीरो के किरदार में दिखाना हमेशा संभव नहीं होता। मुझे ऐसे किरदार निभाना पसंद है, जो एक कलाकार के तौर पर मुझे चुनौती देते हैं और हर नए प्रोजेक्ट के साथ कुछ नया सीखने का मौका देते हैं।”
‘गुड़गांव’ की रहस्यमयी दुनिया से लेकर ‘फ्लेश’ और ‘थार’ की गंभीर कहानियों और ‘टोनी’ में अपने काम तक, अक्षय के किरदारों का चुनाव दिखाता है कि वह सही और गलत की पारंपरिक सोच से हटकर भूमिकाएं निभाना पसंद करते हैं। ‘गजब रात’ के साथ भी वह इसी दिलचस्पी को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके किरदारों का चुनाव बताता है कि उन्हें ऐसे किरदार पसंद हैं, जो अप्रत्याशित हों, जिनकी कई परतें हों और जो इंसानी स्वभाव को करीब से दिखाते हों।