एशिया के पहले स्टॉक एक्सचेंज की नींव रखने वाले शुरुआती व्यापारियों से लेकर शहर के विकास में योगदान देने वाले समाजसेवियों तक, ऋचा चड्ढा मुंबई के सफर को करीब से दिखाती हैं। वह बताती हैं कि कैसे कुछ द्वीपों से शुरू हुआ यह शहर आज देश का एक बड़ा आर्थिक केंद्र बन गया है। मुसाफिरी के नए एपिसोड में ऋचा चड्ढा दर्शकों को दक्षिण मुंबई की ऐतिहासिक गलियों में ले जाती हैं और बताती हैं कि कैसे यह शहर भारत की आर्थिक राजधानी बना।
इस एपिसोड में बॉम्बे के शुरुआती इतिहास को दिखाया गया है। इसकी शुरुआत साल 1661 से होती है, जब कैथरीन ऑफ ब्रागांजा और ब्रिटेन के राजा चार्ल्स द्वितीय की शादी के समय दहेज के रूप में ये द्वीप ब्रिटिश शासन को सौंपे गए थे। इसमें बॉम्बे के दूसरे ब्रिटिश गवर्नर जेराल्ड ऑंगियर की भूमिका पर भी रोशनी डाली गई है। उन्हें आधुनिक बॉम्बे के निर्माण की नींव रखने वालों में से एक माना जाता है। उनकी नीतियों ने व्यापार को बढ़ावा दिया, अलग-अलग समुदायों के लोगों को शहर की ओर आकर्षित किया और मुंबई की आर्थिक तरक्की का रास्ता तैयार किया। स्थानीय लोगों से जुड़ने की उनकी कोशिशें, यहां तक कि मराठी भाषा सीखना भी, यह दिखाता है कि तेजी से विकसित हो रहे बंदरगाह शहर में लोगों के साथ जुड़ना कितना जरूरी था।
एक बरगद के पेड़ के नीचे इकट्ठा होकर व्यापार करने वाले लोगों से लेकर एशिया के पहले स्टॉक एक्सचेंज की स्थापना तक, मुंबई का आर्थिक इतिहास दुनिया भर के व्यापार से जुड़ा रहा है। कपास और अफीम के व्यापार से बनी दौलत ने भी शहर के विकास में अहम भूमिका निभाई। इस एपिसोड में डेविड ससून, जमशेदजी जीजीभॉय और प्रेमचंद रायचंद जैसी जानी-मानी हस्तियों के योगदान को भी दिखाया गया है। इन लोगों ने सिर्फ व्यापार और दौलत कमाने तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि समाज के लिए भी बहुत कुछ किया। उनके सहयोग से स्कूलों, अस्पतालों और कई ऐतिहासिक इमारतों का निर्माण हुआ। उनके योगदान ने मुंबई के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन पर गहरी छाप छोड़ी।

इस एपिसोड की खास बात ऋचा चड्ढा की शानदार लेखनी और गहरी रिसर्च है। वह इतिहास से जुड़ी कम जानी-पहचानी बातों और दिलचस्प कहानियों को इस तरह पेश करती हैं कि दर्शकों को समझ आता है कि आज मुंबई देश का इतना बड़ा आर्थिक केंद्र कैसे बना। ऋचा व्यापार, अंग्रेजों के दौर की अर्थव्यवस्था, अलग-अलग समुदायों और समाजसेवा से जुड़ी कहानियों के जरिए एक अहम सवाल भी उठाती हैं, दौलत के साथ कितनी जिम्मेदारी आती है? खासकर तब, जब अमीर और प्रभावशाली लोगों का उन समुदायों से जुड़ाव कम हो जाता है, जिन्होंने शहर को बनाने में अहम भूमिका निभाई थी।
इस एपिसोड के बारे में बात करते हुए ऋचा चड्ढा कहती हैं, “जब भी हम मुंबई की बात करते हैं, तो इसकी ऊर्जा, यहां मिलने वाले मौकों और उन लोगों की चर्चा करते हैं, जो अपनी जिंदगी बनाने के लिए इस शहर में आते हैं। लेकिन मुझे लगता है कि आज हम जिस मुंबई को जानते हैं, उसके पीछे का इतिहास समझना भी उतना ही जरूरी है। मुंबई की तरक्की में व्यापार, दूसरे शहरों और देशों से आए लोगों और दौलत कमाने वाले लोगों की अहम भूमिका रही है। लेकिन उन लोगों का योगदान भी कम नहीं है, जिन्होंने स्कूलों, अस्पतालों और सार्वजनिक संस्थानों के जरिए समाज को कुछ लौटाया।
“यह सब देखकर मन में सवाल उठता है कि क्या आज दौलत के साथ भी वैसी ही जिम्मेदारी जुड़ी हुई है? कोई शहर सिर्फ पैसों से नहीं बनता, बल्कि उन लोगों से बनता है, जो वहां रहते हैं, अपना योगदान देते हैं और उसे एक अलग पहचान देते हैं। मुसाफिरी के जरिए मैं ऐसी कम जानी-पहचानी कहानियों को सामने लाना चाहती हूं और मुंबई को एक ऐसे नजरिए से देखना चाहती हूं, जिसके बारे में हम अक्सर रुककर सोचते नहीं हैं।”
मुसाफिरी के हर नए एपिसोड के साथ दर्शकों को मुंबई के इतिहास और उससे जुड़ी ऐसी कहानियों को जानने का मौका मिलता है, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। यह एपिसोड दिखाता है कि कैसे मुंबई एक बड़े आर्थिक और वित्तीय केंद्र के रूप में विकसित हुआ। साथ ही, यह इस बात पर भी सोचने के लिए प्रेरित करता है कि दौलत कमाने के साथ-साथ उस समाज को कुछ लौटाना कितना जरूरी है, जिसने हमारी तरक्की में योगदान दिया है।