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सलमान से टाइगर तक: बिश्नोई गैंग का ‘डर का साम्राज्य’ बॉलीवुड पर हावी क्यों?

सलमान से टाइगर तक: बिश्नोई गैंग का ‘डर का साम्राज्य’ बॉलीवुड पर हावी क्यों?

मुंबई के जुहू में अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग ने साफ कर दिया है कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग अब केवल सलमान खान को निशाना नहीं बना रहा, बल्कि पूरी बॉलीवुड को अपने डर के दायरे में लाने की कोशिश कर रहा है। गैंग से जुड़े बताए जा रहे अनिल पंडित ने हमले की जिम्मेदारी लेते हुए चेताया कि जो भी सलमान खान के साथ काम करेगा, वह अगला निशाना बन सकता है।
टाइगर श्रॉफ पर तीन राउंड गोलियां चलीं। वे सुरक्षित रहे, पर उनके ड्राइवर समेत एक अन्य व्यक्ति घायल हुए। इससे पहले सलमान खान के बांद्रा स्थित घर और फार्महाउस पर फायरिंग हो चुकी है, रोहित शेट्टी के जुहू स्थित घर के बाहर गोलियां चलाई गईं और कपिल शर्मा के कनाडा स्थित कैफे पर कई बार हमला हुआ है।
सलमान खान से इस गैंग की दुश्मनी की जड़ 1998 के काला हिरण शिकार मामले से जोड़ी जाती है। लॉरेंस बिश्नोई ने सार्वजनिक रूप से सलमान को मारने की धमकी दी है। अप्रैल 2024 में बाइक सवार दो हमलावरों ने सलमान के घर के बाहर गोलियां चलाईं, जिसकी जिम्मेदारी भी इसी गैंग ने ली।  अब खतरा सलमान तक सीमित नहीं है। टाइगर श्रॉफ पर हमला, कपिल शर्मा के कैफे पर हमले और रोहित शेट्टी के घर के बाहर फायरिंग—इन सबको गैंग की उस रणनीति से जोड़ा जा रहा है जिसमें सलमान से जुड़े या उनके करीब माने जाने वाले लोगों को डराने की कोशिश की जा रही है।
सूत्रों और खुफिया आकलनों के अनुसार माना जा रहा है कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने देश-विदेश में फैले अपने सहयोगियों, शूटरों, सूचना देने वालों और सोशल मीडिया हैंडलरों को मिलाकर कुछ हज़ार लोगों का नेटवर्क तैयार कर लिया है। यह आंकड़ा सत्यापन की दृष्टि से सावधानी से देखा जाना चाहिए, क्योंकि गैंग अक्सर अपनी ताकत को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है। फिर भी यह सच है कि इसका ऑपरेशन अब किसी एक शहर या राज्य तक सीमित नहीं है।  इस नेटवर्क का असली खतरा केवल बंदूकधारियों में नहीं है। इसमें वे लोग भी शामिल माने जाते हैं जो ऑनलाइन धमकियां फैलाते हैं, निशानों की निगरानी करते हैं, हथियार और पैसे की आपूर्ति करते हैं तथा हमले के बाद जिम्मेदारी लेकर मीडिया में डर का माहौल बनाते हैं। यही विकेंद्रित संरचना इस गैंग को पकड़ में आने से बचाती है।
नब्बे के दशक में दाऊद इब्राहिम का अंडरवर्ल्ड बॉलीवुड के लिए एक अलग तरह का खतरा था। उस दौर में फिल्म निर्माताओं, वितरकों और कलाकारों पर पैसा, अधिकार और काम के बंटवारे को लेकर दबाव बनाया जाता था। गुलशन कुमार की हत्या उस दौर की सबसे काली घटना थी, जिसने बॉलीवुड में अंडरवर्ल्ड के दबदबे को उजागर किया था।  दाऊद का मॉडल मुख्यतः मुंबई केंद्रित था—पैसा वसूली, फिल्म वितरण में हिस्सेदारी और धमकी के जरिए नियंत्रण। इसके विपरीत बिश्नोई गैंग का तरीका अधिक विस्तृत और डिजिटल युग का है। वह जेल के अंदर से सोशल मीडिया, ऑडियो संदेश और विदेश स्थित सहयोगियों के जरिए धमकियां फैलाता है। उसका नेटवर्क मुंबई से पंजाब, दिल्ली, कनाडा और अमेरिका तक फैला बताया जा रहा है।
फर्क सिर्फ तरीके का नहीं, मकसद का भी है। दाऊद का ध्यान आर्थिक नियंत्रण पर था, जबकि बिश्नोई गैंग अपनी ‘प्रतिष्ठा’, जातीय-क्षेत्रीय पहचान और सार्वजनिक डर को हथियार बनाकर खुद को बॉलीवुड की राजनीति में दखल देने वाली ताकत मान रहा है। यही इसे और अधिक खतरनाक बनाता है।
लॉरेंस बिश्नोई का जन्म 1993 में पंजाब के फाज़िलका जिले के दुतारावाली गांव में हुआ था। पंजाब यूनिवर्सिटी में छात्र राजनीति से जुड़ने के बाद वह धीरे-धीरे संगठित अपराध की दुनिया में पहुंचा। उस पर हत्या, अपहरण, इक्स्टॉर्शन और हथियार से जुड़े कई मामले दर्ज हैं।  सबसे चिंताजनक बात यह है कि बिश्नोई गुजरात की जेल में होने के बावजूद उसका नेटवर्क देश-विदेश में सक्रिय है। जेल की कोठरी से सोशल मीडिया, ऑडियो संदेश और विदेश स्थित सहयोगियों के जरिए धमकियां देना इस गैंग की रणनीति बन चुकी है।
यह सिर्फ किसी स्टार की सुरक्षा का मुद्दा नहीं है। जब गोलियां चलाकर काम करने की आजादी पर रोक लगाने की कोशिश हो, तो यह पूरी फिल्म इंडस्ट्री और कानून-व्यवस्था के सामने चुनौती है। सिने कर्मियों के संगठनों ने भी इन हमलों की निंदा करते हुए गैंगस्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।  सरकार और एजेंसियों को अब केवल सुरक्षा बढ़ाने से आगे बढ़कर इस गैंग के फंडिंग, हथियार सप्लाई, साइबर-प्रचार और विदेशी मॉड्यूल को तोड़ना होगा। बॉलीवुड को डरा कर ‘रूल’ करने की कोशिश को कानून की सख्त जुबान में जवाब देना जरूरी है, वरना अगली गोली किसी और के नाम की धमकी बन सकती है।