फिल्म निर्देशक और निर्माता आनंद एल. राय का मानना है कि वे कहानी कहने के गुलाम हैं। उनके लिए निर्देशक या निर्माता होना उतना मायने नहीं रखता, जितना कहानी के प्रति ईमानदारी रखना। वे कहते हैं कि उन्हें कहानियों से उतना प्यार है, जितना शायद अपने अंदर के निर्देशक से भी नहीं। उनके अनुसार, कहानी सुनाना ही सबसे जरूरी काम है।
आनंद एल. राय ने बताया कि ‘रांझणा’ बनाने से पहले उन्होंने इम्तियाज अली को ‘रॉकस्टार’ के बारे में बात करते सुना था। उन्हें लगा कि दोनों कहानियों की आत्मा में समानता हो सकती है। इसलिए उन्होंने इम्तियाज को फोन करके पूछा कि क्या दोनों फिल्मों की दुनिया एक जैसी है। उनका कहना था कि अगर ऐसा है, तो वे इम्तियाज की दुनिया को समझना चाहते हैं।
उनके लिए फिल्म बनाने में इरादा, ईमानदारी और अहंकार सबसे बड़े मूल्य हैं। उनका संदेश स्पष्ट है कि रचनाकार को कहानी के गुलाम बनना चाहिए, किसी स्टार, व्यापार या बाहरी दबाव का नहीं। ‘रांझणा’ इसी सोच का परिणाम थी, जिसमें उन्होंने एक गहरी और भावुक प्रेम कहानी को केंद्र में रखा।
आनंद एल. राय के लिए सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि कहानी को जीवंत करने का माध्यम है। उनका मानना है कि सच्ची कहानी तभी दर्शकों तक पहुंचती है, जब निर्माता उसकी आत्मा का सम्मान करे।
