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निमाया बनाएगा नारी को निपुण,नव्या मुख्यमंत्री से मिली

निमाया बनाएगा नारी को निपुण,नव्या मुख्यमंत्री से मिली

असम को कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित अर्थव्यवस्था में अग्रणी बनाने की तैयारी के बीच निमाया प्रतिष्ठान ने राज्य की युवा महिलाओं के लिए एक बड़ी पहल का प्रस्ताव रखा है। प्रतिष्ठान की सह-संस्थापक नव्या नंदा और सम्यक चक्रवर्ती ने आज मुख्यमंत्री डॉक्टर हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात कर 'जेनएआई रेडी नारी' कार्यक्रम को असम में शुरू करने का प्रस्ताव दिया।

यह कार्यक्रम असम निवेश सलाहकार समिति और अशोका विश्वविद्यालय के सामाजिक एवं व्यवहार परिवर्तन केंद्र के साथ मिलकर चलाया जाएगा, जिसे गेट्स प्रतिष्ठान का समर्थन प्राप्त है। इसका विशेष ध्यान जनजातीय क्षेत्रों सहित वंचित समुदायों की युवा महिलाओं पर होगा।

मुख्यमंत्री ने इस वर्ष दावोस में विश्व आर्थिक मंच में कहा था कि असम कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए कार्यबल तैयार करने का नया प्रारूप बना रहा है। जुलाई दो हजार छब्बीस में राज्य ने समावेशी विकास के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता रणनीति भी पेश की थी। निमाया का यह प्रस्ताव उसी दृष्टिकोण को धरातल पर उतारने की दिशा में एक कदम है।

निमाया का कहना है कि असम की महिलाओं में बुनाई, शिल्प और जीवन संघर्षों से उपजी गहरी रचनात्मकता है। यह कार्यक्रम उस रचनात्मकता को हटाता नहीं, बल्कि उसे नई शक्ति देता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता सीखने के बाद एक युवा महिला रूपांकन, लेखन, अनुसंधान, विश्लेषण और विपणन जैसे कार्य स्वयं कर सकेगी। इससे दो मार्ग खुलेंगे - एक भविष्य की नौकरियों में करियर और दूसरा अपना नव-उद्यम शुरू करने का अवसर।

यह कार्यक्रम निमाया के विशेष अनुभवात्मक पाठ्यक्रम पर आधारित है। इसमें छात्राएं केवल पढ़ती नहीं, बल्कि बनाती हैं। जियो रचनात्मक प्रयोगशाला और पेप्सीको जैसी कंपनियों के साथ वास्तविक व्यावसायिक परियोजनाओं पर काम करने का अवसर मिलेगा। यह पाठ्यक्रम राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचे से जुड़ा है और राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद द्वारा मान्यता प्राप्त है। साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत शैक्षणिक ऋण भंडार में सूक्ष्म-ऋण भी मिलेगा।

नव्या नंदा और सम्यक चक्रवर्ती ने कहा, "कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रतिभा का स्थान नहीं लेती, उसे महाशक्ति देती है। असम की महिलाएं इस परिवर्तन के साथ केवल कदम नहीं मिलाएंगी, बल्कि देश को मार्ग दिखाएंगी।"

दो हजार इक्कीस में शुरू हुआ निमाया प्रतिष्ठान अब तक पाँच राज्यों में दस हजार से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षित कर चुका है।