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मिर्ज़ापुर पर कोर्ट का हंटर-शूरवीर का अपमान,बर्दाश्त नहीं

मिर्ज़ापुर पर कोर्ट का हंटर-शूरवीर का अपमान,बर्दाश्त नहीं

नई दिल्ली। मिर्जापुर द मूवी के क्लाइमेक्स में महाराणा प्रताप को समर्पित शूरवीर गाने के इस्तेमाल पर विवाद गहराता जा रहा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को इस मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए फिल्म के निर्माताओं एक्सेल एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के वकील को कड़ी टिप्पणी की।

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने निर्माताओं की ओर से पेश वकील जय के भारद्वाज से सीधा सवाल किया, क्या आपने फिल्म देखी है? वकील ने स्वीकार किया कि उन्होंने फिल्म नहीं देखी है, लेकिन उन्हें निर्देश मिले हैं कि मामला वैसा नहीं है जैसा बताया जा रहा है। इस पर पीठ ने कहा कि वे पहले पूरी फिल्म देखें और अगले दिन आकर बताएं कि संबंधित दृश्य की पृष्ठभूमि में महाराणा प्रताप से जुड़ा गाना इस्तेमाल किए जाने को लेकर उनकी अंतरात्मा संतुष्ट है या नहीं।

याचिकाकर्ता प्रशांत कुमार सिंह ने याचिका में कहा है कि शूरवीर गाना मूल रूप से राजस्थानी गायक रैपरिया बालम ने जुलाई दो हजार बीस में रिलीज किया था और इसे महाराणा प्रताप को श्रद्धांजलि के रूप में बनाया गया था। गाने की शुरुआत में ही कहा गया है कि यह गैंगस्टर गाना नहीं है। याचिका के अनुसार, फिल्म में गैंगवार, ड्रग्स, अवैध हथियार और यौन शोषण जैसे विषय दिखाए गए हैं, ऐसे में एक महान योद्धा को समर्पित गाने को काल्पनिक अपराधियों का महिमामंडन करने के लिए इस्तेमाल करना अपमानजनक है।

सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिकाकर्ता से भी पूछा कि उसने अब तक केंद्र सरकार और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड का रुख क्यों नहीं किया। पीठ ने मौखिक टिप्पणी की, अगर ऐसा किया जा रहा है तो यह निश्चित रूप से अपमानजनक है, लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह इस विषय की विशेषज्ञ नहीं है और ऐसे मामलों में केंद्र को निर्णय लेना चाहिए।

इधर, राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल मकराना ने फिल्म निर्माताओं को चौबीस घंटे का अल्टीमेटम दिया है और गाना नहीं हटाने पर फिल्म का कड़ा विरोध करने की चेतावनी दी है। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को तय की है।