मुंबई। टेलीविजन धारावाहिक 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' में नजर आ रहे अभिनेता आदेश चौधरी के लिए गणेश चतुर्थी केवल त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, उम्मीद और नई शुरुआत का प्रतीक है। बचपन में उनके लिए यह पर्व लड्डू, सजावट और उत्साह तक सीमित था, लेकिन मुंबई में वर्षों बिताने के बाद इसका अर्थ कहीं अधिक गहरा हो गया है।
आदेश कहते हैं, "गणेश चतुर्थी मेरे लिए हमेशा से नई शुरुआत और विश्वास का पर्व रहा है। मुंबई में गणपति सिर्फ त्योहार नहीं, एक इमोशन है। इस दौरान पूरे शहर की ऊर्जा ही बदल जाती है। मेरे लिए आज इसका मतलब है उम्मीद। साल कितना भी कठिन क्यों न रहा हो, जब बप्पा आते हैं तो लगता है सब ठीक हो जाएगा। मुंबई ने मुझे आस्था की असली शक्ति सिखाई है।"
अभिनेता ने अपने बचपन की एक खास परंपरा साझा की। उनके घर में पूरे परिवार के साथ मोदक बनाए जाते थे। मां भरावन तैयार करती थीं और बच्चे उसे आकार देने की कोशिश करते थे, चाहे आकार बिगड़ा ही क्यों न हो। आदेश आज भी व्यस्त शूटिंग के बीच उस परंपरा को जीवित रखने की कोशिश करते हैं।
भगवान गणेश के विघ्नहर्ता स्वरूप से उन्हें जीवन की बड़ी सीख मिलती है। "बप्पा ने शक्ति से नहीं, बल्कि बुद्धि से हर बाधा को दूर किया। जब भी जीवन या करियर में कोई चुनौती आती है, मैं खुद को याद दिलाता हूं कि तुरंत प्रतिक्रिया मत दो, शांत मन से सोचो। हर विघ्न का समाधान शांत दिमाग से ही निकलता है," उन्होंने कहा।
आज उत्सव के भव्य और व्यावसायिक होते स्वरूप पर आदेश का मानना है कि उत्सव और भक्ति के बीच संतुलन जरूरी है। "जश्न बड़ा होना सुंदर है, यह बप्पा के प्रति हमारे प्रेम को दिखाता है, लेकिन शोर और दिखावे में हम अंदर की शांति भूल जाते हैं। ईको-फ्रेंडली मूर्तियां, कम ध्वनि प्रदूषण और दिखावे से ज्यादा भक्ति से ही इसका मूल भाव - सादगी, विनम्रता और विवेक - बना रहेगा।"
आदेश शूटिंग शेड्यूल के अनुसार डेढ़ दिन या पांच दिन के लिए बप्पा को घर लाते हैं। समय न मिलने पर वह दोस्तों के घर जाकर दर्शन, आरती और प्रसाद में शामिल होते हैं। खाने में उकडीचे मोदक और पूरन पोली उन्हें सबसे प्रिय हैं। इस साल उनकी यही प्रार्थना है कि बप्पा सभी के जीवन से विघ्न दूर कर स्वास्थ्य, शांति और करुणा लाएं। गणपति बप्पा मोरया!