91255 06666   |   Registration   |   Login

सही लोगों का साथ हो तो फैसले बेहतर होते हैं: अरहान खान

सही लोगों का साथ हो तो फैसले बेहतर होते हैं: अरहान खान

मुंबई। एमटीवी फनाह, बढ़ो बहू, श्रीवल्ली और बिग बॉस 13 जैसे शोज से पहचान बना चुके अभिनेता अरहान खान का मानना है कि इस इंडस्ट्री में टिके रहने के लिए भरोसा सबसे बड़ी पूंजी है। तेलुगु डेब्यू फिल्म श्रीवल्ली से साउथ में भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके अरहान कहते हैं कि खुद पर, अपनी प्रक्रिया पर और अपने आसपास के सही लोगों पर भरोसा करना ही उन्हें हर उतार-चढ़ाव से निकालता है।

अरहान ने कहा, "मेरी सबसे बड़ी सीख यही रही है कि भरोसा कितना जरूरी है। खुद पर भरोसा, प्रोसेस पर भरोसा और साथ ही सही लोगों का साथ होना। कई बार यह इंडस्ट्री आपको खुद पर शक करने पर मजबूर कर देती है। आप देखते हैं कि किसी और को मौका मिल गया, आपको जो चाहिए था वो नहीं मिला, या कोई प्रोजेक्ट जैसा सोचा था वैसा नहीं हुआ।"

ऐसे मुश्किल वक्त में सही लोगों का साथ ही संबल बनता है। उन्होंने कहा, "उन लम्हों में ऐसे लोग जो आपको और इंडस्ट्री को सच में समझते हों, वो बहुत फर्क पैदा करते हैं। मैंने सीखा है कि आपको सब कुछ खुद जानने की जरूरत नहीं है। सही लोगों से घिरे रहने पर आप इंडस्ट्री में क्या चल रहा है, उससे जुड़े रहते हैं और बेहतर फैसले ले पाते हैं। आखिर में मैं अपनी अंतरात्मा की आवाज पर भरोसा करना सीखा है। अगर एक अभिनेता के तौर पर मुझे कुछ सही लगता है, तो उसे करने का साहस रखना चाहिए।"

अरहान अस्वीकृति को अभिनेता के जीवन का सामान्य हिस्सा मानते हैं। उन्होंने कहा, "कई बार आप किसी प्रोजेक्ट को शिद्दत से चाहते हैं और वो नहीं मिलता, तो कई बार आपको ऑफर आता है पर लगता है कि यह आपके लिए सही नहीं है। दोनों ही इस सफर का हिस्सा हैं।"

उन्होंने अपने बिग बॉस के अनुभव का जिक्र करते हुए कहा, "मुझे पता था कि मुझे लेकर गंभीरता से विचार हो रहा है, पर आखिर में सब कुछ बदल गया और मैं वाइल्ड कार्ड के तौर पर अंदर गया। इसमें थोड़ी विडंबना थी। मैं शुरू से चर्चा में था, पर एंट्री बाद में हुई।"

उन्होंने कहा, "ऐसे शो में जाकर समझ आता है कि कुछ भी आपके नियंत्रण में नहीं है। हर अभिनेता बेहतरीन लोगों के साथ बेहतरीन काम करना चाहता है, पर हर बार परफेक्ट चीज सही समय पर नहीं मिलती। आपको सफलता जितना ही अस्वीकृति को भी गले लगाना आना चाहिए। मैं रिजेक्शन को व्यक्तिगत तौर पर नहीं लेता। एक 'ना' से करियर तय नहीं होता।"