अभिनेत्री स्वरा भास्कर के 'जौहर' को लेकर दिए गए विवादित बयान पर देशभर में आक्रोश की लहर है। इसी क्रम में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भी पश्चिम बंगाल के हावड़ा में चल रही हनुमंत कथा के मंच से स्वरा पर जमकर बरसते हुए उनकी टिप्पणी को संस्कृति और इतिहास से अनजानी बात करार दिया।
दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में 31 अगस्त को 'वुमन, लाइफ, फ्रीडम' टॉक के दौरान स्वरा भास्कर ने 2018 की फिल्म 'पद्मावत' के जौहर सीन पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि फिल्म का यह चित्रण रेप सर्वाइवर्स तक गलत संदेश पहुंचा सकता है और महिलाओं को यह महसूस करा सकता है कि बलात्कार के बाद जीवित रहना शर्म या कायरता है।
इस बयान के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर स्वरा की जमकर आलोचना हुई। कई लोगों ने आरोप लगाया कि उन्होंने रानी पद्मावती और जौहर करने वाली राजपूत महिलाओं को 'कायर' बताया है। हालांकि, विवाद बढ़ने पर स्वरा ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने रानी पद्मावती या जौहर करने वाली महिलाओं को कभी कायर नहीं कहा और उनका बयान गलत तरीके से अनुवादित व प्रस्तुत किया गया है।
पश्चिम बंगाल में हनुमंत कथा के दूसरे दिन धीरेंद्र शास्त्री ने जौहर पर स्वरा के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, "एक तथाकथित महिला ने रानी पद्मावती के बारे में बयान दिया। उस महिला ने जौहर को कायरता कहा। ऐ नाककटु, चंडालन, जौहर कायरता नहीं है, यह बहादुरी, भक्ति और पति के प्रति समर्पण है। आप जौहर की संस्कृति के बारे में क्या जानते हैं?"
बाबा बागेश्वर ने आगे कहा कि जौहर को कायरता बताने वाले लोग भारतीय नारियों के अदम्य साहस, उच्च कोटि के समर्पण और धर्म व प्राणों की रक्षा के लिए किए गए ऐतिहासिक त्याग से पूरी तरह अनजान हैं। उन्होंने रानी पद्मावती के जौहर का जिक्र करते हुए इसे वीरता, समर्पण और सम्मान से जुड़ी परंपरा बताया।
इस विवाद पर करणी सेना, कथावाचक अनिरुद्धाचार्य समेत कई धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने भी स्वरा भास्कर की आलोचना की है। अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि जौहर और नारी सम्मान से जुड़ी इतनी गहरी बात केवल चरित्रवान व्यक्ति ही समझ सकता है।
वहीं, स्वरा भास्कर ने अपने बयान पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा, "मैं साफ तौर पर कह रही हूं कि मैंने कतई ऐसा नहीं कहा कि रानी पद्मावती कायर थीं और मैंने ये भी नहीं कहा कि वो बाकी महिलाएं, वो रानियां जिन्होंने जौहर किया था वो कायर थीं।"
यह विवाद इतिहास, सिनेमा, महिला अधिकार और जौहर के चित्रण पर नई बहस छेड़ चुका है। एक तरफ स्वरा भास्कर का तर्क है कि फिल्मों में जौहर के चित्रण से रेप सर्वाइवर्स तक गलत संदेश जा सकता है, तो दूसरी तरफ धार्मिक और सामाजिक संगठनों का मानना है कि जौहर वीरता, समर्पण और सम्मान की परंपरा है, जिसे कायरता कहना इतिहास और संस्कृति के साथ अन्याय है।
