श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर टेलीविजन जगत के कलाकारों ने भगवान कृष्ण की शिक्षाओं और उनके जीवन दर्शन से जुड़े अनुभव साझा किए। सभी ने एक स्वर में कहा कि जन्माष्टमी केवल पूजा-पाठ और उत्सव का पर्व नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला अवसर है।
अभिनेत्री अद्रिजा रॉय ने बताया कि वे कृष्ण के 'कर्मण्येवाधिकारस्ते' के सिद्धांत को अपने अभिनय जीवन में उतारती हैं। उन्होंने कहा, "हमारा काम रेटिंग, रिव्यू और दर्शकों की प्रतिक्रिया से आंका जाता है। इस पर हमारा नियंत्रण नहीं है। हम केवल अपनी तैयारी और अभिनय को ईमानदार बना सकते हैं। सफलता मिले तो आभारी रहना चाहिए और असफलता मिले तो कड़वाहट नहीं, बल्कि सीख लेनी चाहिए।"
अभिनेता आदेश चौधरी ने जन्माष्टमी को संतुलन का पर्व बताया। उनके अनुसार इस मुकाम पर उन्होंने सीखा है कि महत्वाकांक्षा जरूरी है, लेकिन उसके साथ संतोष भी जरूरी है। जीवन केवल एक लक्ष्य का नाम नहीं है। रिश्ते, परिवार और मन की शांति भी उतनी ही अहम हैं।
अभिनेत्री सोनिया बंसल ने कहा कि श्रीकृष्ण ने कठिन समय में भी धर्म और सत्य के मार्ग पर चलना सिखाया। कई बार करियर में आसान रास्ता सामने होता है, लेकिन उन्होंने हमेशा वही चुना जिससे आत्मा को शांति मिले।
अंगद हसिजा ने जन्माष्टमी को उम्मीद का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि कृष्ण का जन्म कारागार जैसी कठिन परिस्थिति में हुआ, फिर भी उनका पूरा जीवन दुनिया के लिए मार्गदर्शक बना। यह हमें सिखाता है कि बुरा वक्त बीत जाता है, पर आस्था बनी रहनी चाहिए।
अभिनेता अंकुर भारद्वाज, गौरव सक्सेना और सान्वी तलवार ने भी कृष्ण की बहुआयामी छवि को प्रेरणा बताया। गौरव ने कहा कि एक व्यक्ति में पुत्र, मित्र, योद्धा और मार्गदर्शक जैसे कई रूप हो सकते हैं, जो एक अभिनेता के जीवन से काफी मिलता-जुलता है। वहीं सान्वी ने कहा कि वे कृष्ण के योद्धा स्वरूप से सबसे अधिक प्रेरित हैं, जो सिखाता है कि लड़ना ही नहीं, बल्कि किसके लिए लड़ना है, यह जानना ही सच्ची शक्ति है
कलाकारों का मानना है कि श्रीकृष्ण की शिक्षाएं आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में भी मन को स्थिरता, काम में निष्ठा और जीवन में सकारात्मकता का संदेश देती हैं।