कॉमेडी के मंच से एंकरिंग और अभिनय तक का सफर तय करने वाले दिनेश सोनी के लिए 'कॉमेडी का बादशाह' जीतना केवल एक खिताब नहीं, बल्कि करियर का निर्णायक मोड़ था। हालांकि इस शो की असली विरासत के रूप में वह दो दिवंगत हस्तियों को याद करते हैं, जिन्होंने उनके सफर को दिशा दी।
दिनेश ने कहा, "यहाँ मैं दो लोगों का विशेष रूप से उल्लेख करना चाहूंगा, मुमुक्षु मुद्गल जी और राजू श्रीवास्तव जी। दुखद है कि आज दोनों हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन मेरी यात्रा में उनका योगदान अविस्मरणीय है।"
उन्होंने बताया कि मुमुक्षु मुद्गल जी ने ही ऑडिशन से उन्हें चुना था और शो की तैयारी व स्क्रिप्टिंग पर व्यक्तिगत रूप से काम किया। "उनके मार्गदर्शन ने मुझे मजबूत नींव दी। करियर के शुरुआती दौर में मुझ पर विश्वास करने के लिए मैं हमेशा उनका आभारी रहूंगा," उन्होंने कहा।
राजू श्रीवास्तव से जुड़ी यादें भी उतनी ही गहरी हैं। दिनेश ने कहा, "उस समय तक वह बड़े स्टार बन चुके थे, लेकिन अपने कद के बावजूद बेहद विनम्र और प्रोत्साहित करने वाले थे। एक परफॉर्मेंस के बाद मैं उनसे मिलने गया, तो उन्होंने सिर्फ 'शाबाश' नहीं कहा, बल्कि बहुत स्पष्ट फीडबैक दिया कि क्या सुधार कर सकता हूं, क्या अलग कोशिश करनी चाहिए।"
यह प्रोत्साहन एक मुलाकात तक सीमित नहीं रहा। "बाद में कई शोज में उन्होंने मेरा नाम दूसरों से सिफारिश के तौर पर लिया। उनके लिए यह छोटा इशारा रहा होगा, पर मेरे लिए यह दुनिया था। उनका मार्गदर्शन और विश्वास मेरी कहानी में हमेशा सुनहरे अक्षरों में लिखा रहेगा," दिनेश ने भावुक होते हुए कहा।
एंकर, एक्टर और कॉमेडियन तीनों भूमिकाएं निभा चुके दिनेश खुद को सबसे पहले एंकर मानते हैं। उन्होंने कहा, "अगर क्रम लगाऊं तो पहले एंकर, फिर एक्टर और अंत में कॉमेडियन। कॉमेडी स्वाभाविक रूप से एंकरिंग का हिस्सा बन जाती है। और एक एक्टर के तौर पर आप सिर्फ कॉमेडी तक सीमित नहीं रह सकते। आपको नवरस के हर भाव - कॉमेडी, एक्शन, ड्रामा, रोमांस - को जीना आना चाहिए। एंकरिंग से मेरी यात्रा शुरू हुई और वही आज भी मेरे व्यक्तित्व का मूल है।"