‘मिर्जापुर’ फिल्म की रिलीज़ से पहले अभिनेता अली फज़ल ने अपने नाना अहमद सईद साहब के अखाड़े से जुड़े अतीत को याद किया और गुड्डू पंडित के लिए की गई जूजुत्सु की तैयारी से जोड़ा
‘मिर्ज़ापुर’ फिल्म की सिनेमाघरों में रिलीज़ से पहले अली फज़ल ने लखनऊ का एक खास दौरा किया। इस दौरान वह अपने परिवार के उस इतिहास से दोबारा जुड़े, जो हमेशा उनके दिल के करीब रहा है। अभिनेता एक अखाड़े में पहुंचे, जहां उन्होंने देसी कुश्ती और पहलवानी की उस परंपरा को करीब से महसूस किया, जो उनके नाना अहमद सईद साहब के बचपन और परवरिश का अहम हिस्सा रही थी।
अली के लिए यह दौरा इसलिए भी खास था क्योंकि अखाड़े में खड़े होकर उन्हें अपने नाना और उन संस्कारों की याद आई, जिनके बारे में उन्होंने बचपन से सुना था। अखाड़े की अहमियत के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “जब आप इस जगह में कदम रखते हैं, तो आपका अहंकार खत्म हो जाता है।”
अली ने बताया कि उनके नाना की परवरिश पहलवानी के माहौल में हुई थी। उन्होंने कहा, “मेरे नाना की तर्बियत पहलवानी में हुई है।” हालांकि अली ने खुद कभी कुश्ती नहीं की थी और शुरुआत में अखाड़े में जाने को लेकर थोड़ा झिझक भी रहे थे, लेकिन वह खुद को वहां जाने से रोक नहीं पाए। उन्होंने कहा, “पहले मैं इस जगह में आने को लेकर थोड़ा झिझक रहा था, क्योंकि मैंने पहले कभी कुश्ती नहीं की है। लेकिन यहां कुछ ऐसा है जो आपको वापस अपनी ओर खींचता है।”
दिलचस्प बात यह है कि इस एहसास ने अली को एक दूसरी तरह की युद्ध कला की याद दिला दी जूजुत्सु की, जिसे उन्होंने ‘मिर्ज़ापुर’ फिल्म में गुड्डू पंडित के किरदार में वापस आने की तैयारी के दौरान सीखा था। दोनों कलाओं के बीच समानता बताते हुए उन्होंने कहा, “ठीक वैसे ही जैसे मैं जूजुत्सु की ओर दोबारा खिंचा चला गया। इसमें आप पीठ के बल गिर नहीं सकते, वरना आपके अंक चले जाएंगे।”
गुड्डू पंडित के किरदार में वापसी के लिए अली ने केवल सामान्य व्यायाम पर निर्भर रहने के बजाय जूजुत्सु को अपनी तैयारी का हिस्सा बनाया। इसका उद्देश्य किरदार के लिए ज़रूरी ताकत, लड़ने की क्षमता और शरीर की मजबूती को बेहतर तरीके से तैयार करना था। अब कुश्ती और पहलवानी से उनका जुड़ाव उनकी इस तैयारी को एक और व्यक्तिगत आयाम देता है, खासकर ऐसे किरदार के लिए जो उनके सबसे ज्यादा शारीरिक मेहनत वाले किरदारों में से एक है।
अली ने अपने नाना की पारंपरिक खान-पान की आदतों के बारे में भी बात की और उस जीवनशैली की एक झलक साझा की, जो पहलवानों की दुनिया से जुड़ी रही है और जिसके बारे में उन्होंने बचपन से सुना था।
इस तरह अली का लखनऊ दौरा दो अलग-अलग दुनियाओं को एक साथ जोड़ता है, एक तरफ उनके नाना की पहलवानी की विरासत और दूसरी तरफ वह युद्ध कला जिसने गुड्डू पंडित के किरदार को तैयार करने में उनकी मदद की। लेकिन अली के लिए दोनों के पीछे एक ही सोच दिखाई देती है, अनुशासन, मज़बूत बने रहना और अपने अहंकार को पीछे छोड़ देना।
अली फज़ल अभिनीत और गुड्डू पंडित के किरदार वाली ‘मिर्ज़ापुर’ फिल्म 4 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी।