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योगी डी चोपड़ा: "कहानी बताना ज़रूरी था" — 'एक नई डोर' पर बयान

योगी डी चोपड़ा: "कहानी बताना ज़रूरी था" — 'एक नई डोर' पर बयान

प्रोड्यूसर योगी डी चोपड़ा ने शॉर्ट फिल्म 'एक नई डोर' के बारे में कहा है कि यह फिल्म स्वीकृति और समझ की बात करती है। मंडला स्टूडियोज और पलाश दत्ता क्लासिक प्रोडक्शंस की यह फिल्म जयती भाटिया, पलाश दत्ता और विक्की शिंदे ने निभाई है। निर्देशन राजेश बंलवाई ने किया है और कहानी पलाश दत्ता की है।
योगी ने बताया कि वे खुद लेखक, निर्देशक और निर्माता हैं और पहले भी राजेश बंलवाई के साथ काम कर चुके हैं, इसलिए टीम में पहले से तालमेल था। उन्होंने कहा कि यह कहानी इसलिए चुनी क्योंकि इसमें समलैंगिक और अन्य लिंग पहचान वाले लोगों के सही प्रतिनिधित्व की बात है। वे पहले भी समाज के संवेदनशील मुद्दों पर काम कर चुके हैं और बाल शिक्षा व वरिष्ठ नागरिकों जैसे विषयों पर परियोजनाएँ चलाते हैं। जब यह कहानी उन्हें मिली तो लगा कि इसे बताना जरूरी है।
योगी ने कहा कि मीडिया में दिखने से समाज की सोच बदलती है। हाशिए पर रहने वाले समुदायों की कहानियाँ जितनी अधिक बताई जाएँगी, स्वीकार्यता उतनी ही बढ़ेगी। वे चाहते हैं कि दर्शक फिल्म देखकर खुश हों, इसे साझा करें और उससे जुड़ें। उन्होंने पलाश दत्ता का योगदान अहम बताया क्योंकि वे खुद उस समुदाय से हैं और उनकी समझ से कहानी को सही दिशा मिली।
राखी के मौके पर रिलीज़ होने के बावजूद योगी ने कहा कि यह कहानी केवल त्योहार तक सीमित न रहे, इसका संदेश हर समय प्रासंगिक है। हालिया विवादित विज्ञापन के संदर्भ में उन्होंने कहा कि आजकल विवादों को प्रचार का हिस्सा बनाया जाता है, लेकिन इस फिल्म की मंशा सादी है — एक असरदार और अर्थपूर्ण कहानी कहना और लोगों को लेबल से परे रिश्तों को देखने के लिए प्रेरित करना।