भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत की हालिया टिप्पणी को लेकर मचा विवाद लगातार चर्चा में है। इसी मामले पर अभिनेता आशुतोष राणा की प्रतिक्रिया सामने आई है, जिसमें उन्होंने भाषा और शब्दों की अहमियत पर जोर दिया। पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान आशुतोष राणा ने कहा, “देखिए, मेरा अपना ये मानना है कि शेर दहाड़ता है, हाथी चिंघाड़ता है, कुत्ता भौंकता है, तो किसी भी जीव की पहचान उसके कंठ से निकलने वाले स्वर से होती है। इसलिए भाषा का बहुत महत्व है, और भाषा के मामले में हमारे यहां अकसर कहा जाता है कि बातों से ही हाथी की सवारी का सम्मान मिलता है, और बातों के कारण ही, आपके द्वारा बोले गए शब्दों के कारण ही आपको उसके पैर के नीचे डाले जाने वाला दंड मिलता है।”
उन्होंने आगे कहा, “हमारे शब्द ही हमारे सम्मान का प्रतीक होते हैं और हमारे शब्द ही हमारे अपमान का कारण बनते हैं। तो भाषा के ऊपर तो हमें निश्चित रूप से ध्यान देना चाहिए, किसी भी हिसाब से।”
आशुतोष राणा के इस बयान को कंगना रनौत के उस विवादित पोस्ट के संदर्भ में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा था, “वह मुश्किल से 15 साल की है, यह खुद बोल रही है कि उसने अपने पूरे जीवन में कभी मोदी जी के खिलाफ कुछ भी पोस्ट नहीं किया, लेकिन उस दिन उसके दोस्त उसे वहां ले गए और लोगों ने उसे गाली देने के लिए उकसाया। आओ अपने बच्चों को दुष्ट नारीवादी और शैतानी वामपंथियों से बचाओ, हमें अपने बच्चों को उनसे बचाना होगा। खुद ध्यान दो कि एक भी स्कार्फ/बुर्का वाली ने भोंडा प्रदर्शन नहीं किया, लेकिन हमारी बेटियां इतनी आसानी से बहक जाती हैं, ऐसा क्यों? हम एक समुदाय के रूप में कहीं न कहीं असफल हो रहे हैं। हमें आत्मनिरीक्षण करना चाहिए। हमें अपनी बेटियों की रक्षा करनी चाहिए।”
कंगना की यह टिप्पणी सामने आने के बाद विवाद और बढ़ गया है। आरोप है कि उन्होंने जेन ज़ी और युवा पीढ़ी को ‘गटरछाप’ कहा और हिंदू लड़कियों को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की। इसी को लेकर उनकी आलोचना लगातार जारी है। इससे पहले अभिनेता सोनू सूद भी कंगना की टिप्पणी को शर्मनाक बता चुके हैं।
आशुतोष राणा का बयान इस पूरे विवाद में एक संयमित प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना शब्दों की मर्यादा, भाषा की जिम्मेदारी और सार्वजनिक जीवन में वाणी की सावधानी पर जोर दिया है। उनके अनुसार, व्यक्ति की पहचान और उसके सामाजिक सम्मान का संबंध सीधे उसकी भाषा से जुड़ा होता है।
