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टीआरपी सफलता का पैमाना नहीं, अच्छा काम ही असली पहचान: गौरव एम शर्मा

टीआरपी सफलता का पैमाना नहीं, अच्छा काम ही असली पहचान: गौरव एम शर्मा

टेलीविजन की दुनिया में अपनी दमदार अदाकारी से अलग पहचान बना चुके अभिनेता गौरव एम शर्मा का मानना है कि लगातार टीआरपी के पीछे भागने से बेहतर है लगन और निरंतरता के साथ अच्छा काम करना। झनक, अनुपमा, ये रिश्ता क्या कहलाता है, दीया और बाती हम, शादी मुबारक, बादल पे पांव है जैसे कई हिट शोज में यादगार किरदार निभाने के बाद अब वह कलर्स टीवी के शो 'सेहर' में हैदर के किरदार में नजर आ रहे हैं। गौरव कहते हैं कि हर प्रोजेक्ट ने उन्हें एक अभिनेता के तौर पर और निखारा है।

अपने मौजूदा किरदार के बारे में बात करते हुए गौरव ने कहा, "हैदर माहिद का कजिन भाई और हुस्ना का बेटा है। वह पढ़ा-लिखा, हैंडसम और बेहद महत्वाकांक्षी है। उसका सबसे बड़ा लक्ष्य मुफ्ती-ए-शहर की गद्दी हासिल करना है, जिस पर फिलहाल माहिद का राज है। हैदर की सबसे अच्छी बात जो मुझसे मिलती है, वह है बेस्ट बनने की उसकी चाहत। यह जज्बा मैं भी अपनी जिंदगी में रखता हूं।"

अपने सफर को याद करते हुए गौरव बताते हैं कि अभिनय कभी उनकी योजना में नहीं था। वह कहते हैं, "अभिनेता बनने से पहले मैं एक आईटी प्रोफेशनल के तौर पर काम कर रहा था। अगर अभिनय में नहीं आता तो शायद आज भी आईटी इंडस्ट्री में ही होता।"

टेलीविजन के बदलते दौर पर उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया ने इंडस्ट्री की तस्वीर बदल दी है। अब कंटेंट सिर्फ सास-बहू तक सीमित नहीं है, प्रोडक्शन क्वालिटी, विजुअल अपील और कहानियों में विविधता आई है। रियलिटी शोज, स्टैंड-अप कॉमेडी और वर्टिकल कंटेंट भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

टीआरपी सिस्टम के अस्थायी निलंबन पर गौरव ने साफ कहा, "मैंने कभी टीआरपी को ज्यादा महत्व नहीं दिया। शो को लंबा चलाने में टीआरपी मदद करती है, लेकिन यह तय नहीं करती कि शो अच्छा है या बुरा। एक एक्टर के तौर पर हमारा काम सिर्फ अच्छे अभिनय पर फोकस करना है, क्योंकि अच्छा काम कभी नजरअंदाज नहीं होता।"