वरिष्ठ अभिनेत्री सीमा पाहवा ने छात्र प्रदर्शन के समर्थन में अपनी बात रखते हुए कहा कि ऐसे समय में चुप रहना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों की आवाज़ आज दबाई जा रही है, उनके साथ खड़ा होना हर जिम्मेदार नागरिक की जिम्मेदारी है। सीमा पाहवा के अनुसार, देश को ऐसे लोगों की जरूरत है जो डर के बजाय सच के साथ खड़े हों और अन्याय के खिलाफ साफ़ शब्दों में बोलें। उन्होंने यह भी कहा कि केवल अपनी सुविधा और प्रतिष्ठा बचाने के लिए मौन रहना सही नहीं है, क्योंकि जब समाज के संवेदनशील मुद्दों पर प्रभावशाली लोग चुप रहते हैं, तो गलत संदेश जाता है।
सीमा पाहवा ने सरकार के खिलाफ बोलने के डर से चुप रहने वालों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि समाज के हर क्षेत्र से साहसिक और स्पष्ट आवाजें सामने आएं। उनके मुताबिक, लोगों को अपने काम या पद की चिंता छोड़कर छात्रों के समर्थन में खुलकर बोलना चाहिए। उन्होंने कहा कि इंसानियत को बचाने के लिए मौन तोड़ना जरूरी है।
हालिया घटनाओं पर नाराज़गी जताते हुए सीमा पाहवा ने कहा, “मुझे समझ नहीं आ रहा कि यह सब कैसे रुकेगा, कौन इसे रोकेगा और इसे रोकने के लिए क्या किया जा सकता है, क्योंकि इंसानियत खत्म हो चुकी है। यह इंसानियत नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा कि इतने लोगों का अब भी चुप रहना हैरानी की बात है। उनके मुताबिक, सरकार के खिलाफ बोलने से काम या ओहदा छिन जाने का डर रखना शर्मनाक है।
उन्होंने कहा कि देश को आज हर क्षेत्र और पेशे के सफल लोगों के खुले समर्थन की ज़रूरत है। सीमा पाहवा ने चिंता जताई कि लोग अपनी इज़्ज़त बचाने के लिए चुप्पी साधे बैठे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन बच्चों के साथ आज अन्याय हो रहा है, क्या वे भविष्य में ऐसे लोगों का साथ देंगे। अंत में उन्होंने लोगों से घरों से बाहर निकलने, आवाज उठाने और छात्रों का समर्थन करने की अपील की।
