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ऑडिशन ने खोला नया रास्ता: पल्लवी पुरोहित

07 Jul 2026
ऑडिशन ने खोला नया रास्ता: पल्लवी पुरोहित

पंकज अवस्थी-

पल्लवी पुरोहित का टेलीविज़न सफर किसी नीयत योजना का परिणाम नहीं रहा; यह परिचय, संयोग और बार-बार मिलने वाली भूमिकाओं का सहज परिणाम रहा। उन्होंने बताया कि लेखक शरद चंद्र त्रिपाठी के साथ पुराने संबंधों ने यह दरवाज़ा खोला, मगर नाम सुझाया जाना ही काफी नहीं था — उन्होंने कई ऑडिशन और लुक-टेस्ट दिए और तब जाकर निर्माताओं ने उन्हें चुना।
पल्लवी कहती हैं कि ऑफ़-स्क्रीन वे बहुत शरारती और मासूम प्रवृत्ति की हैं, जबकि ऑन-स्क्रीन उन्हें अक्सर संयमी, डरपोक या विनम्र किरदार निभाने पड़ते हैं। इस असम्मति के बारे में वह मुस्कुराकर बताती हैं कि सुधांशु पांडेय को पहले देखा तो वे गंभीर और कटु लगे, पर मिलने पर सादगी और कोमलता का अहसास हुआ — वे बिना ग्लिसरीन के नैसर्गिक आँसू बहा लेते हैं।
उनके मुताबिक़ कई बार भूमिका का चुनाव चुटकियों में हुआ: एक बार कैस्टिंग डायरेक्टर ने उन्हें गलत 'पल्लवी' समझ कर बुलाया, पर ऑडिशन कराने पर पसंद कर लिया गया। पल्लवी मानती हैं कि परिचय मदद करता है पर प्रक्रिया समान रहती है; प्रतिभा और परख जरूरी हैं।
वह यह भी मानती हैं कि वर्तमान में वे कुछ भय के साथ भूमिका निभा रही हैं, पर आने वाले समय में उनका 'चाँदी अवतार' उभरेगा। परिवार और सोशल मीडिया के रील्स के माध्यम से ही वह सह-कलाकारों के किरदारों को देख पाती हैं, पूरे शो नहीं। पल्लवी की यह यात्रा बताती है कि टीवी की दुनिया में संयोग और सादगी का भी बड़ा हिस्सा होता है — और कभी-कभी वही हिस्से कलाकार की पहचान गढ़ देते हैं।