हिमांशु राज़
अक्षय कुमार की फिटनेस का असली राज महंगे जिम उपकरणों में नहीं बल्कि उनकी सादा, नियमित और अनुशासित जीवनशैली में छिपा है। वे खुद बार‑बार कह चुके हैं कि वे जिम के परफेक्ट शौकीन नहीं हैं और केवल यात्रा या आवश्यकता पड़ने पर मशीनों का सहारा लेते हैं। उनकी प्राथमिकता फंक्शनल स्ट्रेंथ पर रहती है, जिसे वे रोज़ाना के बॉडीवेट एक्सरसाइज जैसे पुश‑अप्स, पुल‑अप्स, स्क्वाट्स और हैंगिंग लेग रेज़ से मजबूत करते हैं। वे मार्शल आर्ट्स, तैराकी, दौड़ और साइक्लिंग जैसी सहनशक्ति बढ़ाने वाली गतिविधियों को अपने फिटनेस प्लान का अहम हिस्सा मानते हैं, क्योंकि इससे हृदय‑फेफड़ों की क्षमता और स्टैमिना बेहतर होता है। अक्षय का मानना है कि प्राकृतिक गतिविधियाँ — पेड़ों पर चढ़ना, रस्सी पर झूलना या ढलानों पर चढ़ाई जैसी हरकतें — जिम की मशीनों से भी अधिक प्रभावी साबित होती हैं, क्योंकि ये मांसपेशियों पर नियंत्रण, संतुलन और कोर‑स्टेबिलिटी देते हैं। खान‑पान में वे बहुत सख्त हैं; प्रोसेस्ड और जंक फूड से पूरी तरह परहेज़ करते हैं और प्रोटीन‑समृद्ध भोजन को प्राथमिकता देते हैं। उनकी डाइट में अक्सर अंडे, ब्राउन राइस, कम वसा वाला चिकन, अखरोट‑बादाम और दूध जैसी पोषक वस्तुएँ शामिल रहती हैं, और वे शाम 6:30 बजे के बाद खाने से बचते हैं ताकि नींद से पहले पाचन पूरा हो सके। वे सप्ताह में एक दिन व्रत रखते हैं और शास्त्रीय दिनचर्या को प्रभावी मानते हैं। वे कहते हैं कि मसल बनाने के लिए सिर्फ सप्लीमेंट्स या प्रोटीन पाउडर पर निर्भर नहीं होना चाहिए; सही तकनीक, प्रशिक्षक की निगरानी और संतुलित आहार ज्यादा जरूरी हैं ताकि चोट से बचा जा सके और परिणाम टिकाऊ हों। कुल मिलाकर अक्षय की फिटनेस का सूत्र सादगी, अनुशासन और सक्रिय जीवनशैली है — यही वजह है कि वे 58 साल की उम्र में भी मंच पर युवा जैसी ऊर्जा और शारीरिक क्षमता दिखा पाते हैं।