ज़ी5 की नई फिल्म 'सतलज' का ट्रेलर रिलीज़ होते ही मन पर असर छोड़ देता है — यह किसी मनोरंजन की सीधी पेशकश नहीं, बल्कि एक बड़े सामाजिक घाव की पहचान है। हनी त्रेहान के निर्देशन में बनी यह सच्ची घटनाओं से प्रेरित पारी उस मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह की है, जिसकी दशकों लंबी लड़ाई ने 25,000 से ज़्यादा लापता लोगों के लिए न्याय की उम्मीद जलाई। दिलजीत दोसांझ ने इस भूमिका में केवल अभिनय नहीं किया, उन्होंने किरदार को जीया सा कर दिया है; ट्रेलर में उनकी मौजूदगी देख कर रूह कांप उठती है। अर्जुन रामपाल समेत बाकी कलाकारों की सूक्ष्म अभिनय भी कहानी की भारी मौनता और दर्द को प्रभावी बनाती है।
ट्रेलर का माहौल डार्क और गंभीर है — इतिहास की उन परतों को उजागर करता है जिन्हें हमेशा दबा दिया गया। छवियों में सरकारी हस्तक्षेप, भय और समाज में फैली खामोशी की झलक मिलती है, और संगीत, साउंड डिज़ाइन और धीमी कैमरा चालें मिलकर एक कसकर दबा हुआ वातावरण बनाती हैं। यह फिल्म सत्ता, जवाबदेही और नैतिक दुविधाओं की तीखी पड़ताल है: कैसे शांति के नाम पर उठाए गए कदमों ने जनजीवन में दरारें डालीं और अनगिनत परिवारों को अनुत्तरित सवालों में छोड़ दिया।
फ़िल्म परिवारों की असहनीय तड़प, खोई हुई यादों और सूनी दहलीज़ों की कहानियों को संवेदनशील तरीके से सामने लाती है। जसवंत सिंह का अकेला संघर्ष व्यक्तिगत हिट नहीं है — वह लाखों अनसुनी आवाज़ों का सामूहिक किस्सा बन जाता है, जो न्याय के लिए न तो थमता है और न ही झुकता है। 'सतलज' दिखाती है कि सत्य की खोज में किस तरह का त्याग और मानसिक चोटें आती हैं, और यह भी कि इंसान की हिम्मत कितनी दूर तक जा सकती है जब वह सच्चाई के पीछे खड़ा होता है।
यह फिल्म मनोरंजन से परे जाकर एक चेतावनी और स्मरण दोनों है: कि सच को दबाया जा सकता है पर मिटाया नहीं जा सकता। यह उन खोए हुए लोगों की आवाज़ बनती है और दर्शक से सवाल करती है — क्या हम अपने अतीत की कठोर सच्चाइयों को पहचानेंगे? 3 जुलाई 2026 को ज़ी5 पर रिलीज़ हो रही इस सामाजिक ड्रामा में दिलजीत, अर्जुन और अन्य कलाकार एक तीव्र, जमीनी और ज़रूरी कहानी को पर्दे पर उतारते दिखेंगे।