राजीव डेरोलिया
अभिनेत्री और निर्माता अनुपमा प्रकाश कहती हैं कि मानसून वह मौसम है जिसका उन्हें हर साल बेसब्री से इंतज़ार रहता है। तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और हिंदी फिल्मों तथा वेब धारावाहिकों में अपने बहुमुखी अभिनय से पहचान बना चुकीं अनुपमा ने निर्माता के रूप में भी कई प्रोजेक्ट्स किये हैं। व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद वे बरसाती सरल सुखों को अपनाना नहीं भूलतीं।
अनुपमा बताती हैं कि मानसून की सबसे बड़ी खूबी इसकी दी हुई भावना है। “बारिश, हरी-भरी वसुंधरा और भीगी मिट्टी की खुशबू एक नई ताजगी और शांति देती है,” वे कहती हैं। उनके लिए बरसात के दिन विश्राम और आत्मसात के होते हैं—एक गर्म चाय की प्याली, आरामदायक भोजन और मनपसंद संगीत। “अगर समय मिले तो मैं खिड़की के पास बैठकर बस बारिश देखना पसंद करती हूँ,” वे बताती हैं, और कहती हैं कि ऐसे शांत पल व्यस्त जीवन में उन्हें तरोताजा कर देते हैं।
संगीत उनके मानसूनी अनुभवों का अहम हिस्सा है। अनुपमा बताती हैं कि एक खास गीत उनके दिल के बेहद करीब है—इसकी धुन बारिश की सौम्यता और पुरानी यादों की कोमलता को समेटे रहती है। खाने की बात करें तो वे पारंपरिक बरसाती व्यंजनों को तरजीह देती हैं। “बरसात में गरम पकौड़े और चाय का मिलन शाम को और भी खास बना देता है,” वे मुस्कुराकर कहती हैं।
यात्रा का अवसर मिले तो लोनावला उनकी पहली पसंद रहता है। वहां की हरी-भरी चोटियाँ, कुहासे से ढका मौसम और सन्नाटा उन्हें सुकून देते हैं। अनुपमा मानती हैं कि मानसून केवल मौसम नहीं, बल्कि नयी ऊर्जा और छोटे-छोटे सुखों को फिर से महसूस करने का समय है।