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तकनीक के जाल में फंसा समाज, पर्दे पर खुलती साइबर ठगी की परतें

तकनीक के जाल में फंसा समाज, पर्दे पर खुलती साइबर ठगी की परतें

देश में डिजिटल अपराध अब केवल पुलिस की फाइलों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह आम लोगों के घरों तक पहुंच चुका है। सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले एक प्रसिद्ध इन्फ्लुएंसर अंकुश बहुगुणा को चालीस घंटे तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर मानसिक रूप से बंधक बनाकर लाखों रुपये ठगने की घटना ने पूरे देश को हिला कर रख दिया। वहीं दूसरी ओर जानी मानी अभिनेत्री जान्हवी कपूर का कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार किया गया फर्जी वीडियो सामने आने के बाद यह सवाल और गहरा हो गया है कि तकनीक किस हद तक किसी की निजता और सम्मान को चोट पहुंचा सकती है। इन दोनों घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि आज के समय में अपराध का तरीका बदल चुका है, अब चाकू या बंदूक नहीं बल्कि एक मोबाइल फोन और इंटरनेट कनेक्शन ही ठगी का सबसे बड़ा हथियार बन गया है।

इसी बदलते अपराध के स्वरूप को भारतीय सिनेमा और ओटीटी मंचों ने अपनी कहानियों का विषय बनाना शुरू कर दिया है। ये कहानियां दर्शकों का मनोरंजन ही नहीं करतीं बल्कि उन्हें आगाह भी करती हैं। ऐसी ही एक महत्वपूर्ण सीरीज है स्कैम उन्नीस सौ बानवे। हंसल मेहता के निर्देशन में बनी इस सीरीज में प्रतीक गांधी ने हर्षद मेहता की भूमिका निभाई है। यह कहानी बताती है कि कैसे बैंकिंग प्रणाली की कमजोरियों का लाभ उठाकर शेयर बाजार में इतना बड़ा घोटाला किया गया जिसने पूरे देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया। यह सीरीज इस बात की याद दिलाती है कि जब हम बिना सवाल किए किसी व्यवस्था पर भरोसा कर लेते हैं तो ठगी की गुंजाइश वहीं से शुरू होती है।

वर्तमान समय की हकीकत को सबसे करीब से दिखाती है फिल्म कंट्रोल। इस फिल्म की कहानी एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के इर्द-गिर्द घूमती है जो अपने पूर्व प्रेमी की यादों को अपनी डिजिटल दुनिया से हटाने के लिए एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आधारित एप्लिकेशन का सहारा लेती है। लेकिन धीरे-धीरे वही तकनीक उसके निजी डेटा, उसकी तस्वीरों और उसकी पहचान पर कब्जा कर लेती है। यह फिल्म आज के दौर में डेटा चोरी, ऑनलाइन निगरानी और डीपफेक जैसे खतरों को बेहद प्रभावी तरीके से सामने लाती है।

इसी तरह स्कैम दो हजार तीन नकली स्टाम्प पेपर के कारोबार की कहानी कहती है तो जामतारा जैसी सीरीज यह दिखाती है कि कैसे झारखंड के एक छोटे से शहर से फोन कॉल के जरिए पूरे देश में लोगों को ठगा जा रहा है। ये युवा खुद को बैंक अधिकारी बताकर लोगों से उनकी गोपनीय जानकारी हासिल कर लेते हैं और पल भर में उनका खाता खाली कर देते हैं। यह तरीका आजकल हो रहे डिजिटल अरेस्ट के अपराधों से बिल्कुल मिलता जुलता है। इसके साथ ही बैड बॉय बिलेनियर्स जैसी डॉक्यूमेंट्री बड़े उद्योगपतियों से जुड़े आर्थिक विवादों की पड़ताल कर यह बताती है कि लालच और जवाबदेही की कमी किस तरह बड़े घोटालों को जन्म देती है। कुल मिलाकर ये सभी कृतियां समाज को यह संदेश दे रही हैं कि डिजिटल युग में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।