नवरात्रि का पर्व कई लोगों के लिए गरबा, संगीत, सजना-सँवरना और परिवार के साथ बिताए पलों का प्रतीक है। लेकिन इन उत्सवों के पार यह त्योहार आस्था, साहस और एकजुटता का संदेश भी देता है। ‘हुई गुम यादें’ की अभिनेत्री ज्योति तिवारी के लिए नवरात्रि बचपन की सरल यादों को ताजा करती है और उन मूल्यों की याद दिलाती है, जो रोजमर्रा के जीवन में भी उतने ही मायने रखते हैं।
ज्योति के अनुसार बुराई पर अच्छाई की जीत हमेशा कोई बड़ी या नाटकीय घटना नहीं होती। वे कहती हैं, “रोज की जिंदगी में भी यह जीत होती है—नकारात्मकता के बजाय सकारात्मकता चुनना, क्षमा करना और किसी की नकारात्मकता को अपने भीतर उतरने न देना। मैंने सीखा है कि कठिन समय में भी सही काम करते रहना और अपने आप पर सच्चे रहना ही सबसे बड़ी जीत है।”
नवरात्रि उन्हें घर की उस त्योहारी माहौल से जोड़ती है, जहां तैयारियां, संगीत, सजधज और परिवार का साथ खास अहसास देते थे। ज्योति कहती हैं कि बचपन की सरलता सबसे ज्यादा याद आती है, जब त्योहार का मतलब सिर्फ परिवार के साथ रहना और छोटे-छोटे पलों का आनंद लेना होता था। नवरात्रि का संगीत सुनते ही वे उन दिनों में वापस चली जाती हैं।
उनका मानना है कि त्योहारों की सबसे बड़ी विरासत परिवार के साथ मिलकर उन्हें मनाना है। व्यस्तता, काम और मोबाइल के बीच ये अवसर सबको रुककर एक-दूसरे से जुड़ने का मौका देते हैं। ज्योति चाहती हैं कि अगली पीढ़ी सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि उसके पीछे की भावना को भी समझे।
अभिनय की दुनिया में शूटिंग, यात्रा और अनियमित समय के बीच त्योहार परिवार के साथ बिताना उनके लिए विशेष महत्व रखता है। वे कहती हैं कि काम से परे रिश्ते और अपने लोग ही असली सहारा हैं। कुछ घंटों का साथ भी हो तो वे उसे पूरी तरह जीने की कोशिश करती हैं।
गरबा, व्रत और उत्सव से आगे ज्योति नवरात्रि से ‘गरिमा के साथ शक्ति’ का पाठ लेती हैं। उनके अनुसार मां दुर्गा की शक्ति का अर्थ हमेशा आक्रामकता नहीं है; कठिन परिस्थितियों में धैर्य रखना, छोड़ना जानना और दिल में सकारात्मकता बनाए रखना भी असली ताकत है।
