फैशन डिजाइनर अंजलि फोगाट ने हाल ही में ब्लूम फाउंडेशन की पहल ‘गरबा बियॉन्ड बॉर्डर्स’ में हिस्सा लिया। यह आयोजन पारंपरिक गरबा को मानव तस्करी के खिलाफ जागरूकता का मंच बनाने के लिए आयोजित किया गया था। अंजलि के अनुसार, संस्कृति, फैशन और सामुदायिक जुड़ाव मिलकर गंभीर मुद्दों पर बातचीत शुरू कर सकते हैं।
उन्होंने कहा, “मानव तस्करी एक वैश्विक मानवीय संकट है। मेरे लिए यह केवल किसी एक कार्यक्रम या आंकड़े तक सीमित मुद्दा नहीं है। यह मानवीय गरिमा, स्वतंत्रता, सुरक्षा और हर व्यक्ति के शोषणमुक्त जीवन के अधिकार से जुड़ा है।”
अंजलि फोगाट का इस मुहिम से जुड़ाव नया नहीं है। उन्होंने बताया कि वे पिछले करीब सात वर्षों से ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी की ‘अनचेन्ड’ पहल से जुड़ी हैं और मानव तस्करी के खिलाफ जागरूकता फैलाने वाले प्रयासों का समर्थन करती आई हैं। उनके काम को यूनिवर्सिटी ने भी मान्यता दी है।
ब्लूम फाउंडेशन के साथ उनकी भागीदारी केवल मानव तस्करी तक सीमित नहीं रही। उन्होंने कहा, “मैं ब्लूम फाउंडेशन के व्यापक कार्यों से भी जुड़ी हूं, जिनमें महिला शिक्षा, कैंसर जागरूकता और मानव तस्करी जैसे मुद्दे शामिल हैं।” फाउंडेशन महिलाओं के सशक्तिकरण, शिक्षा और व्यक्तिगत-व्यावसायिक विकास के लिए कार्य करती है।
इस लंबे जुड़ाव के कारण ही उन्हें ‘गरबा बियॉन्ड बॉर्डर्स’ का हिस्सा बनना महत्वपूर्ण लगा। उनका कहना था, “जब फैशन, नृत्य, संस्कृति और समुदाय मिलकर जागरूकता बनाने का अवसर देते हैं, तो मुझे भाग लेने की जिम्मेदारी महसूस होती है।”
उन्हें आयोजन की सबसे प्रभावी पहल नीले और सफेद रंगों का चुनाव लगा। आयोजिका वैशाली देव ने इन रंगों को मानव तस्करी के खिलाफ एकजुटता का प्रतीक बनाया। कार्यक्रम में लोगों को इन्हीं रंगों में शामिल होने के लिए प्रेरित किया गया था।
अंजलि फोगाट ने कहा, “इतने सारे लोगों को एक ही रंगों में एकजुट देखना अविश्वसनीय रूप से प्रभावशाली था। मैं पहले भी कई गरबा कार्यक्रमों में गई हूं, लेकिन ऐसा पहली बार देखा जहां रंगों को मानवीय संदेश से जोड़ा गया।”
उनके लिए यही पहल की सबसे खूबसूरत बात थी। उन्होंने कहा, “जागरूकता किसी रंग जितने सरल चीज से भी शुरू हो सकती है। लोग नाचने, उत्सव मनाने और शाम का आनंद लेने आए, लेकिन उनके साथ एक संदेश भी था। मेरा मानना है कि बदलाव ठीक इसी तरह शुरू होता है।”
