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हनुमान भक्ति और राष्ट्रगौरव का संदेश देती ‘हनुमान भक्त’ कविता

हनुमान भक्ति और राष्ट्रगौरव का संदेश देती ‘हनुमान भक्त’ कविता

डॉ. शैलेन्द्र श्रीवास्तव एक बहुआयामी व्यक्तित्व हैं—रंगमंच, टेलीविजन और फिल्मों के जाने-माने अभिनेता के साथ-साथ हिंदी व उर्दू के कवि तथा लेखक भी हैं। उन्होंने ‘द स्पेस सिटी सिग्मा’, ‘जय हनुमान’, ‘सीआईडी’ जैसे टीवी धारावाहिकों और ‘गदर’, ‘पान सिंह तोमर’, ‘सरदार’ जैसी फिल्मों में अभिनय किया है; उनकी कविताएँ भी नियमित रूप से प्रकाशित होती रही हैं।
उनकी प्रस्तुत कविता ‘हनुमान भक्त’ फ्लाईदुबई उड़ान में कॉकपिट पर हमले के दौरान हनुमान चालीसा का पाठ कर धैर्य और साहस दिखाने वाले भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार को समर्पित है। यह रचना उनकी वीरता, राष्ट्रगौरव और हनुमान भक्ति के भाव को श्रद्धापूर्ण शब्दों में उभारती है।

“हनुमान भक्त "

हनुमान भक्त स्मित मच्छार।
तुम निकले धुरन्धर धुवाँधार।।
हे हिन्दू सनातनी भारतीय,
तुम वीर पुरुष सम्माननीय।
जो शौर्य तुमने दिखलाया है,
वो शौर्य विश्व में अद्वितीय।
हनुमान भक्त स्मित मच्छार।
तुम निकले धुरन्धर धुवाँधार।।
जब सहचालक ने घात किया,
विमान ध्वस्त का प्रयास किया।
तुम पाठ हनुमान चालीसा कर,
दुष्ट का विफल प्रयास किया।
हनुमान भक्त स्मित मच्छार।
तुम निकले धुरन्धर धुवाँधार।।
जब छल से दुष्ट ने बार किया,
तुमने उसका प्रतिकार किया।
तुम बुरी तरह से घायल थे,
पर द्वार कॉकपिट खोल दिया।
हनुमान भक्त स्मित मच्छार।
तुम निकले धुरन्धर धुवाँधार।।
यदि दुष्ट सफल वो हो जाता,
भारत का गौरव खो जाता।
भारत के विमान चालक पर,
विश्वास विश्व का मिट जाता।
हनुमान भक्त स्मित मच्छार।
तुम निकले धुरन्धर धुवाँधार।।
सम्मान देश का बचा लिया,
भारत का गौरव बढ़ा दिया।
भारत- इज़राइल मैत्री को
साहस अदम्य से बचा लिया।
हनुमान भक्त स्मित मच्छार।
तुम निकले धुरन्धर धुवाँधार।।
— डॉ. शैलेन्द्र श्रीवास्तव