अभिनय की दुनिया में लुक्स को अक्सर सफलता का पैमाना माना जाता है, लेकिन अभिनेत्री शिखा पांडे की सोच इससे बिल्कुल अलग है। फिलहाल टीवी सीरियल 'मन्नत' में नजर आ रहीं और फिल्म 'ओए चिल मार' से सुर्खियों में आईं शिखा मानती हैं कि खूबसूरत दिखना जरूरी है, पर किसी को परखने का आधार सिर्फ चेहरा नहीं हो सकता।
शिखा कहती हैं, "इंडस्ट्री में हमेशा बेस्ट दिखने का प्रेशर रहता है और फिजिकल अपीयरेंस मायने भी रखती है। लेकिन जब मुझे किसी के बारे में राय बनानी होती है तो मैं लुक्स से आगे देखती हूं।" उनके लिए असली किरदार इस बात से झलकता है कि कोई व्यक्ति दूसरों के साथ कैसा बर्ताव करता है।
"मैं जब भी किसी से मिलती हूं, तो सबसे पहले देखती हूं कि वह अपने आसपास के लोगों से कैसे पेश आता है। क्या वह सिर्फ कैमरे के लिए अच्छा बन रहा है या वाकई दिल से दयालु है, यह फर्क साफ दिख जाता है," शिखा ने कहा।
उनके मुताबिक सिर्फ गुड लुक्स से लंबे समय तक प्रभाव नहीं छोड़ा जा सकता। "किसी की एनर्जी, उसका बर्ताव और लोगों को सहज महसूस कराने की क्षमता ज्यादा अहम है। अगर कोई दिखने में बहुत अच्छा है लेकिन उसकी वाइब्स पॉजिटिव नहीं हैं, तो मैं ऐसे व्यक्ति से दूरी बनाना पसंद करूंगी," वह स्पष्ट करती हैं।
शिखा की नजर में दयालुता और सहानुभूति सबसे ऊपर है। उनका क्रम साफ है- "पहले दयालुता और सहानुभूति, फिर व्यक्तित्व और आत्मविश्वास।"
उन्हें आत्मविश्वास से भरे लोग स्वाभाविक रूप से आकर्षित करते हैं। "मुझे ऐसे लोग पसंद हैं जो खुद को लेकर आश्वस्त हों। एक आत्मविश्वासी व्यक्ति हमेशा आपको ऊपर उठाता है। इसलिए मैं दोस्ती या काम के लिए ऐसे ही लोगों को चुनूंगी।"
शिखा का मानना है कि इंडस्ट्री भले ही लुक्स पर फोकस करती हो, पर उनकी निजी कसौटी पर खरा वही उतरता है जिसमें सच्ची इंसानियत, सकारात्मक ऊर्जा और खुद पर भरोसा हो।