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संयुक्त राष्ट्र में गूंजी भूमि की आवाज: जलवायु संकट भविष्य नहीं, वर्तमान की हकीकत

संयुक्त राष्ट्र में गूंजी भूमि की आवाज: जलवायु संकट भविष्य नहीं, वर्तमान की हकीकत

अभिनेत्री भूमि सतीश पेडनेकर इस वर्ष यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। वैश्विक मंच पर उन्होंने जलवायु परिवर्तन को लेकर दुनिया को चेताया है। यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम इंडिया की पहली नेशनल एडवोकेट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स के रूप में यह उनकी महत्वपूर्ण उपस्थिति है।

भूमि ने कहा, मैं यहां सिर्फ एक संदेश लेकर आई हूं। जलवायु संकट भविष्य की समस्या नहीं है। यह वास्तविक लोगों के साथ वास्तविक स्थानों पर घट रहा है और हमें अभी जलवायु कार्रवाई की आवश्यकता है। उनका यह वक्तव्य उस समय आया है जब दुनिया गर्मी, बाढ़, सूखा और समुद्र के बढ़ते जलस्तर से जूझ रही है।

भूमि केवल फिल्मों तक सीमित अभिनेत्री नहीं हैं। वे एक विचारशील नागरिक के रूप में समाज के ज्वलंत मुद्दों पर काम कर रही हैं। उन्होंने महिला अधिकारों, लैंगिक हिंसा और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर अपनी बात रखी है।

जलवायु के क्षेत्र में उनका योगदान जमीनी स्तर पर दिखता है। उन्होंने असम और नेपाल में बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत सामग्री पहुंचाने और पुनर्वास कार्यों में भूमिका निभाई। पर्यावरण संरक्षण के लिए वे क्लाइमेट वारियर नामक पहल भी चला रही हैं, जिसके माध्यम से युवाओं को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया जाता है। शिक्षा सुधारों को लेकर भी वे मुखर रही हैं।

संयुक्त राष्ट्र जैसे मंच पर भूमि की उपस्थिति यह साबित करती है कि भारतीय कलाकार मनोरंजन के साथ वैश्विक नीतियों में भी भागीदारी कर रहे हैं। उनकी आवाज युवाओं को प्रेरणा देती है कि लोकप्रियता का उपयोग समाज में सकारात्मक और ठोस परिवर्तन लाने के लिए किया जाना चाहिए।