फिल्मों में काम करने वाली मम्मियों का जीवन आम माताओं की तुलना में अधिक व्यस्त और चुनौतीपूर्ण होता है। शूटिंग, यात्राओं, प्रचार कार्यक्रमों और देर रात तक चलने वाले काम के कारण वे हर समय बच्चों के साथ मौजूद नहीं रह पातीं। इसके बावजूद बच्चों को मां के प्यार, समय, सुरक्षा और भावनात्मक सहारे की जरूरत होती है। इसलिए उन्हें अपने व्यस्त कार्यक्रम के साथ बच्चों की देखभाल के लिए संतुलित योजना बनानी चाहिए।
मां को कोशिश करनी चाहिए कि वह रोज कुछ समय बच्चे के लिए जरूर निकाले। यदि वह शूटिंग के कारण घर से दूर है तो फोन या वीडियो कॉल पर बच्चे से बातचीत कर सकती है। उससे पढ़ाई, दोस्तों, भोजन और दिनभर की गतिविधियों के बारे में पूछना चाहिए। घर लौटने के बाद बच्चे के साथ बैठकर खाना खाना, खेलना, कहानी सुनना या उसकी बातें ध्यान से सुनना बहुत महत्वपूर्ण है। बातचीत के दौरान मोबाइल और काम से जुड़े दूसरे व्यवधान दूर रखने चाहिए, ताकि बच्चे को महसूस हो कि मां उसके लिए पूरी तरह उपलब्ध है।
बच्चों के लिए नियमित दिनचर्या जरूरी है। समय पर सोना, पौष्टिक भोजन करना, पढ़ाई, खेल और मनोरंजन के लिए निश्चित समय रखना उनके शारीरिक और मानसिक विकास में मदद करता है। फिल्मी मम्मियों को बच्चों की चिकित्सकीय देखभाल को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बच्चों को समय-समय पर बाल रोग विशेषज्ञ के पास ले जाना चाहिए, ताकि उनकी लंबाई, वजन, पोषण, आंखों, कानों, दांतों और उम्र के अनुसार शारीरिक एवं मानसिक विकास की जांच हो सके।
टीकाकरण की सभी तारीखों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना चाहिए। बच्चे को तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, लगातार उल्टी-दस्त, अत्यधिक सुस्ती या व्यवहार में अचानक बदलाव दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। बिना चिकित्सकीय परामर्श के बच्चों को दवा देना उचित नहीं है। डॉक्टर बच्चे के स्वास्थ्य, भोजन, नींद और विकास के संबंध में सही मार्गदर्शन देते हैं।
मां यदि लगातार शूटिंग पर रहती है तो पिता, दादा-दादी या किसी विश्वसनीय देखभालकर्ता की सहायता ली जा सकती है। हालांकि बच्चे की भावनात्मक जरूरतों, पढ़ाई और स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में मां की भागीदारी बनी रहनी चाहिए। नैनी देखभाल में मदद कर सकती है, लेकिन मां का प्यार और मार्गदर्शन किसी दूसरे व्यक्ति से पूरी तरह नहीं मिल सकता।
फिल्मी मम्मियों को अपनी प्रसिद्धि और सफलता का दबाव बच्चों पर नहीं डालना चाहिए। प्रत्येक बच्चे को अपनी रुचि और प्रतिभा के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए। सोशल मीडिया पर उसकी तस्वीरें और निजी जानकारी साझा करते समय उसकी निजता का ध्यान रखना जरूरी है। अच्छी परवरिश महंगी सुविधाओं से नहीं, बल्कि समय, स्वास्थ्य सुरक्षा, अनुशासन, समझदारी और बिना शर्त प्यार से होती है।

( लेखक जाने-माने बच्चों के चिकित्सक हैं )