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"सोशल मीडिया को जीवन न बनने दें" : चैताली कोहली

"सोशल मीडिया को जीवन न बनने दें" : चैताली कोहली

अभिनेत्री चैताली कोहली, जिन्होंने "क्रू", "खौफ", "सिंगल पापा" और "क्रिमिनल जस्टिस: बिहाइंड क्लोज्ड डोर्स" जैसे प्रोजेक्ट्स से अपनी पहचान बनाई है, अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस पर जीवन के अनुभव और युवा पीढ़ी को दी जाने वाली सलाह पर खुलकर बोलीं। वे मानती हैं कि हर असफलता के साथ एक सीख जुड़ी होती है और अगर उन्हें अपनी जवानी में कोई एक बात बताई जाती, तो वह होती—परफेक्शन की पीछा छोड़कर अपने ऊपर जल्दी भरोसा करना। "मैं अपनी छोटी उम्र की खुद से कहती—परफेक्शन का पीछा बंद करो और खुद पर थोड़ा जल्दी विश्वास करना शुरू करो। आपकी राह किसी और की तरह दिखनी जरूरी नहीं। हर रिजेक्शन, हर देरी और हर setback कुछ बड़ा तैयार कर रहा है। सीखते रहो, दयालु बनो और रिस्क लेने से घबराओ मत। किसी के चैप्टर 20 से अपने चैप्टर 2 की तुलना मत करो। समय आएगा अगर आप लगातार बने रहेंगे।"
चैताली के अनुसार आज के युवाओं के सामने सबसे बड़ा मुद्दा दूसरों के साथ बराबरी बनाए रखने का दबाव है। "करियर हो या रिश्ते, पैसा हो या सोशल मीडिया—लोग सब कुछ तुरंत हासिल करने की चाह में हैं। हम भूल जाते हैं कि सफलता कोई दौड़ नहीं है। कौशल बनाइए, मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखिए और अपनी रफ्तार से आगे बढ़िए, दूसरों की स्वीकृति की तलाश में न हैं।"
सोशल मीडिया पर उनका मत है कि प्लेटफॉर्म खुद नुकसान नहीं पहुँचाता, बल्कि उपयोग का तरीका मायने रखता है। "मैं कंटेंट क्रिएटर हूं और जानती हूं कि यह अवसर, सीख और कनेक्शन दे सकता है। पर जब यह असली ज़िंदगी की जगह ले लेता है तो हानिकारक हो जाता है। सीमाएं बनाइए—जो प्रेरित करे उन्हें फॉलो करें, जो कमतर महसूस करवाए उन्हें नहीं। याद रखें ऑनलाइन तस्वीर केवल संकुचित अंश है। असली बढ़ोतरी और खुशी ऑफलाइन अनुभवों में मिलती है; सोशल मीडिया एक साधन होना चाहिए, स्वामी नहीं।"