निर्देशक तुषार हिरानंदानी और निर्माता निधि परमार हिरानंदानी ने 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में राजकुमार राव अभिनीत बायोपिक 'श्रिकांत' को सर्वश्रेष्ठ हिंदी फीचर फिल्म का पुरस्कार मिलने पर गहरी प्रसन्नता व्यक्त की। दोनों ने कहा कि यह उपलब्धि केवल फिल्मकारों का नहीं, बल्कि उस कहानी से जुड़े हर व्यक्ति की है जिसने जहाँ बाधाएँ थीं वहाँ उम्मीद जगाई। हिरानंदानी ने बताया कि यह परियोजना उनके लिए व्यक्तिगत महत्व रखती है — वे वर्षों से श्रिकांत बोला की जीवनी पर फिल्म का अधिकार पाने के लिए प्रयासरत रहे और अंततः विश्वास व धैर्य से यह फिल्म बनाई गई। उन्होंने राजकुमार राव की निष्ठा और पूरी टीम की मेहनत को श्रेय दिया और कहा कि समाज कई बार ऐसे बाधा-निर्माण करता है जिनका सामना करने का साहस ही असली विजय है।
निधि परमार हिरानंदानी ने कहा कि फिल्म का प्रत्येक कदम संवेदनशीलता और ईमानदारी पर आधारित था, इसलिए यह राष्ट्रीय स्तर की मान्यता और भी सांत्वनादायक है। उन्होंने निर्माता, सहयोगी और दर्शकों को धन्यवाद दिया और विशेष रूप से श्रिकांत बोला की हिम्मत व आशा को श्रेय दिया। फिल्म ने वास्तविकता के करीब प्रतिनिधित्व के लिए 70 से अधिक दिव्यांग कलाकारों की एक्टिंग को शामिल कर समर्थक समीक्षाएँ हासिल कीं, जिससे पर्दे पर समावेशिता की नई मिसाल कायम हुई।
'श्रिकांत' की इस जीत को दोनों ने ऐसी कहानियों के लिए प्रेरणा बताया जो सहानुभूति मांगने के बजाय आत्मविश्वास और दृढ़ता का उत्सव मनाती हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह सम्मान भविष्य में और निर्माताओं को ऐसे सशक्त, सीमाएँ चुनौती देने वाले विषयों पर काम करने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
