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धुरंधर की सफलता के बाद बॉलीवुड को और साहसी होना पड़ेगा - सैफ अली खान

धुरंधर की सफलता के बाद बॉलीवुड को और साहसी होना पड़ेगा - सैफ अली खान

हिमांशु राज-

रणवीर सिंह स्टारर और आदित्य धर निर्देशित ‘धुरंधर’ फ्रैंचाइज़ी ने हिंदी सिनेमा के परिदृश्य पर अप्रत्याशित दबदबा बनाया है, और इसी के संदर्भ में अभिनेता सैफ अली खान ने फिल्म उद्योग से कहीं अधिक साहसिक फैसले लेने की अपील की है। ‘धुरंधर’ के दोनों भागों ने मिलकर वैश्विक बॉक्स ऑफिस पर ₹3100 करोड़ से ज़्यादा की कमाई दर्ज की, जिससे यह भारतीय सिनेमा की पहली ऐसी फ्रैंचाइज़ी बन गई है जिसने 3000 करोड़ का आंकड़ा पार करते हुए 3100 करोड़ से आगे की दौड़ तय की है। रिपोर्टों के अनुसार, दूसरे भाग ‘धुरंधर 2’ ने अकेले ही लगभग ₹1831 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन कर फ्रैंचाइज़ी की कुल कमाई को ₹3186 करोड़ से ऊपर पहुंचाया, जबकि साल 2026 में रिलीज़ अन्य हिंदी फिल्मों के मुकाबले इसकी कमाई का अंतर बेहद विशाल रहा।
एक अंतरराष्ट्रीय मनोरंजन पत्रिका को दिए इंटरव्यू में सैफ अली खान ने कहा कि ‘धुरंधर’ के बाद उन्हें भारतीय सिनेमा में एक तरह की रेखा खिंची दिखती है—एक समय ‘धुरंधर’ से पहले और एक समय उसके बाद का। उनके शब्दों में, “लोग अब ऐसी फिल्मों को देखने के लिए ज़्यादा उत्साहित हैं, जो जुनून के साथ बनाई गई हों, थोड़ी अलग हों और वाकई किसी चीज़ के बारे में हों। मैं अब एक समय को धुरंधर से पहले और धुरंधर के बाद के रूप में देखता हूं। अब ये हमारे ऊपर है कि हम पकड़ बनाते हैं या नहीं और जागते हैं या नहीं।” सैफ ने स्वीकार किया कि कई फिल्में दर्शकों को मानकर चलती हैं कि वे किसी भी फॉर्मूले से संतुष्ट हो जाएंगे, लेकिन निर्माण प्रक्रिया में कई अहम बातें ‘स्लिप थ्रू द क्रैक्स’ हो जाती हैं, यानी ध्यान से निकल जाती हैं, जिसके कारण फिल्में अपेक्षित गुणवत्ता तक नहीं पहुंच पातीं।
सैफ अली खान ने ‘धुरंधर’ के संगीत और उसके इस्तेमाल के तरीके को भी भारतीय सिनेमा में बदलाव का संकेत बताया। उनके मुताबिक, फिल्म में नए गीतों के साथ कुछ रीमिक्स ट्रैक भी हैं, जिन्हें कहानी के भीतर इस तरह पिरोया गया कि वे अलग से ‘आइटम सॉन्ग’ या प्रमोशनल गाने की तरह नहीं लगते, बल्कि नैरेटिव का स्वाभाविक हिस्सा बन जाते हैं। उन्होंने विशेष रूप से उस गीत का ज़िक्र किया जिसमें सजावटी ‘आइटम नंबर’ के बजाय शादी के माहौल जैसा दृश्य रचा गया है और दो कलाकारों का प्रदर्शन कहानी में ही घुल-मिल जाता है; सैफ के अनुसार यह तरीका आंखों को नहीं खटकता और दर्शक का ध्यान भटकाने के बजाय फिल्म की भावनात्मक धारा को मजबूत करता है।
सैफ की अपनी बॉक्स ऑफिस यात्रा पिछले कुछ वर्षों में चुनौतियों से भरी रही है—‘तान्हाजी’ के बाद उनकी कई फिल्मों को उम्मीद के अनुरूप प्रतिक्रिया नहीं मिली—इसी पृष्ठभूमि में उनका मानना है कि ‘धुरंधर’ जैसी फ्रैंचाइज़ी ने साबित कर दिया है कि बड़े स्तर पर व्यावसायिक सफलता वही फिल्में हासिल कर रही हैं, जो जोखिम उठाकर नई शैली, नए नैरेटिव और संगीत के नए प्रयोगों को अपनाने के लिए तैयार हैं।