हिमांशु राज-
दिग्गज लेखक सैल्मन रुशदी ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा कि एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) रचनात्मक काम के लिए उपयोगी नहीं है, क्योंकि उसमें नई चीजें खोजने की शक्ति मौजूद नहीं है। वरायटी से हुई बातचीत में जब उनसे पूछा गया कि रचनात्मक कार्य में एआई का कितना हिस्सा होना चाहिए, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "कुछ भी नहीं। शून्य।" उनका कहना था कि एआई बड़े पैमाने पर जानकारी तो समेट सकता है और उसके आधार पर नए-नए रूप बना सकता है, पर वह कुछ ऐसा कर ही नहीं सकता जो पहले किसी ने किया ही न हो। रुशदी के अनुसार असली कला वही है जो लोगों ने पहले नहीं की हो, इसलिए उन्हें एआई में "शून्य से भी कम" दिलचस्पी है।
रुशदी ने यह भी कहा कि सर्वाधिक श्रेष्ठ कला सिर्फ मनोरंजन से कहीं अधिक है। "यह चुनौती देती है," उन्होंने कहा। "और कभी-कभी लोग इसे पसंद नहीं करते, पर यही कारण है कि उसे करना चाहिए।"
अपने उपन्यासों की स्क्रीन उपयुक्तता के बारे में रुशदी ने बताया कि उद्योग में उनकी किताबों में रुचि लंबे समय से रही, पर स्क्रीन पर कम ही उनका काम सजीव हुआ है। वे 2012 की फिल्म "मिडनाइट्स चिल्ड्रेन" का ज़िक्र करते हैं, जिसे उन्होंने निर्देशक दीपा मेहता के साथ मिलकर स्क्रीन-एडैप्ट किया था और जिसके परिणाम से वे संतुष्ट रहे।
रुशदी ने कहा कि एक समय "मिडनाइट्स चिल्ड्रेन" की टीवी-सीरीज़ की घोषणा फिल्ममेकर विशाल भारद्वाज के साथ हुई थी, पर वह आगे नहीं बढ़ पाई। "हाँ, वह काम नहीं हुआ," उन्होंने कहा। "पैसे और पटकथा के कारण — और लगता है नेटफ्लिक्स को स्क्रिप्ट का दिशा पसंद नहीं आई। ऐसा होता रहता है। बहुत प्रतिभाशाली फिल्मकार थे, पर यह आगे नहीं बढ़ा।"
वह कहते हैं कि फिलहाल उनकी कुछ किताबों की बहु-एपिसोडीय टीवी-एडाप्टेशन और एक फिल्म के रूप में "द ग्राउंड बीनैथ हर फीट" की भी दिलचस्पी फिर से उठी है। "दो-तीन किताबों के बारे में बातचीत चल रही है," रुशदी ने कहा, "पर तब मानिए जब आप सचमुच देखें।"
कई बार यह तर्क मिलता है कि अच्छे उपन्यास बड़े पर्दे पर सफलतापूर्वक नहीं उतरते। इस पर रुशदी ने पलटकर कहा कि इस दृष्टि का हमेशा सत्य होना जरूरी नहीं है और उदाहरण के तौर पर उन्होंने "द लॉर्ड ऑफ द रिंग्स" ट्राइलॉजी, लुइचिनो विस्कोंटी की "द लेपर्ड" और मार्टिन स्कॉर्सेसे की "द एज ऑफ इनोसेन्स" जैसी कृतियों का हवाला दिया, जिन्हें वे पुस्तक के समकक्ष या उसके बराबर मानते हैं।
भविष्य की योजनाओं पर रुशदी ने अपनी 2024 की संस्मरणात्मक किताब "नाइफ: मेडिटेशन्स आफ्टर अन अटेम्प्टेड मर्डर" पर आधारित एलेक्स गिबनी निर्देशित डॉक्यूमेंटरी "नाइफ: दी एटेम्पटेड मर्डर आफ सलमान रशदी" का जिक्र किया। यह फिल्म जनवरी में सैंडेंस फिल्म फेस्टिवल में विश्व प्रीमियर कर चुकी है। रुशदी के अनुसार यह यूके में सितंबर के शुरू में प्रीमियर करने वाली है और उसी समय अमेरिका में भी दिख सकती है; इसके साथ यूरोप और अन्य क्षेत्रों में वितरण समझौते भी हो रहे हैं।
जब उनसे अपने जीवन पर आधारित बायोपिक के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वे लेखक इसीलिए नहीं बने कि अपने बारे में लिखें। "दरअसल, मुझे लगता है कि मैं सबसे रोचक विषय नहीं हूँ। मैं लेखक इसलिए बना कि कुछ नया बना सकूँ।"
रुशदी ने यह भी बताया कि वे एक नए उपन्यास पर काम कर रहे हैं, पर वह अभी शुरुआती दौर में है और उन्होंने विवरण साझा करने से इन्कार कर दिया।