कई यादगार पलों से भरे बॉलीवुड के दौर को याद करती हुईं अभिनेत्री और मानवतावादी सोमी अली ने निधि वासनदानी के पॉडकास्ट में अपनी जिंदगी के बदलते पहलुओं पर खुलकर बात की। 1990 के दशक के अपने फिल्मी सफर को उन्होंने संजीवनी बताते हुए कहा कि उस वक्त उन्हें कई बड़े सितारों के साथ काम करने का अवसर मिला। शुरुआती दिनों में कैमरे के सामने डर से घिरी रहने का जिक्र करते हुए सोमी ने बताया कि अभिनेता संजय दत्त ने एक शूट के दौरान उन्हें सान्त्वना दी और कहा कि उन्हें ऐसे अभिनय करना चाहिए जैसे सामने कोई परिचित बैठा हो—यही सरल सलाह उनकी कैमरा-डर को दूर करने में काम आई।
सोमी ने गोविंदा, ओम पुरी, सतीश शाह, राकेश बेदी और जावेद जाफरी सहित कई सहयोगियों के साथ मिलने वाली मित्रता और मज़ेदार पलों का स्मरण किया। उन्होंने संकेत दिया कि उस दौर की कई अनकही कहानियाँ हैं, जिन्हें वे अपनी आत्मकथा में साझा करेंगी। दिव्या भारती के साथ उनके घनिष्ठ सम्बन्ध और उस विश्वास का भी उन्होंने जिक्र किया जिसे उन्होंने कभी तोड़ा नहीं।
मनोरंजन जगत की पहचान के बावजूद सोमी का दर्द यह है कि उनकी मानवीय सेवाओं को अक्सर उनकी एक निजी पहचान से छाँटा जाता है। नो मोर टियर्स नामक संस्थान की स्थापना करके वह शोषण व मानव तस्करी के पीड़ितों का समर्थन कर रही हैं, लेकिन समाज में उनकी इस सेवाभावना को वही मान्यता कम मिलती है। पीड़ितों से उन्होंने कहा कि मौन न रखें—सहायता, न्याय और हिम्मत के साथ अपनी बात उठाएँ। उन्होंने युवा कलाकारों को ईमानदारी बनाए रखने, मेहनत करने और अपनी मान्यताओं का त्याग न करने की सलाह दी और बताया कि टैलेंट के साथ लगातार प्रयास और थोड़ी किस्मत भी ज़रूरी है।
सोमी अब सिनेमा से परे एक नई जिम्मेदारी लेकर जी रही हैं; नो मोर टियर्स के जरिए जिन लोगों की वे मदद करती हैं, वे ही उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा हैं। उनका आशय है कि उन्हें याद इसी काम के लिए रखा जाए—उन्हें आशा है कि लोग उन्हें शोषण रोधी संघर्ष और बचाव के कार्यों के लिए याद रखें, न कि केवल उनके फिल्मी दौर या व्यक्तिगत रिश्तों के लिए।
