राजीव डेरोलिया
टीवी की लोकप्रिय शोज़ जैसे "कहानी घर-घर की", "यम है हम", "हमारी बहू सिल्क" में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके मानस शाह का मानना है कि सर्वश्रेष्ठ कला वह नहीं जो सबसे चमकदार हो, बल्कि वह है जो थिएटर से निकलने के बाद दर्शक की सोच बदल दे। मानस कहते हैं, "सिर्फ रोमांस, सिर्फ एक्शन से बढ़कर अच्छा संदेश देना ज़रूरी है। मुझे राजू हिरानी सर जैसे फिल्में पसंद हैं — हँसी, रोना, ड्रामा और साथ में संदेश। '3 इडियट्स' और 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' इसके बेहतरीन उदाहरण हैं।" उन्होंने बताया कि कहानी कहने की ताकत असली जीवन पर गहरा असर डालती है और अक्सर किसी फिल्म या सीरीज़ को देखने के बाद इंसान के जीवन में एक मोड़ आ जाता है। इस विश्वास को उन्होंने खुद अपनी फिल्मों में उतारा है। मानस ने हाल ही में एक ऐसी फिल्म बनाई है जो महिलाओं की पीरियड्स पर आधारित है और उस सोच को बदलने की कोशिश करती है जिसमें परिवार का पुरुष सदस्य या साथी दर्द और असुविधा से जुड़ी जिम्मेदारी में भाग ले। "अगर दर्द कम नहीं कर सकते तो कम से कम साथ दें," वे कहते हैं। मानस के लिए पैमाना बड़ी-बड़ी परियोजनाएँ नहीं, बल्कि सामग्री की गहराई है। "छोटी हो सकती है, पर अगर एक अच्छा संदेश दे रही हो तो मैं उसे प्राथमिकता दूँगा। मेरे हिसाब से यही अच्छा प्रदर्शन है।" फिल्मों के माध्यम से सामाजिक बदलाव और संवेदना जगाना मानस शाह की प्राथमिकता है — वह मनोरंजन के साथ-साथ जिम्मेदार कहानी कहना चाहते हैं जो दर्शकों के जीवन में सकारात्मक असर छोड़े।