टीवी सीरियल 'साराभाई वर्सेज साराभाई' में रोसेश के रूप से पहचाने जाने वाले अभिनेता राजेश कुमार ने 2017 में अभिनय से दूरी बनाकर अपने पैतृक गाँव गया (बिहार) लौटकर खेती शुरू कर दी। यह फैसला उनके प्रशंसकों के लिए हैरान करने वाला था, लेकिन उन्होंने माना कि यह बदलती दिशा उनके लिए सद्गुरु और ईशा फाउंडेशन के साथ हुई चर्चाओं का परिणाम थी। शुरुआत में वे सद्गुरु के अनुयायी नहीं थे, पर समय के साथ उन्होंने फाउंडेशन के इवेंट होस्ट किए और 'रैली फॉर रिवर्स' जैसे अभियानों में सक्रिय भाग लिया। रैली के दौरान सद्गुरु की एक कही हुई पंक्ति — ‘‘मुझे अपने राज्य से 100 युवा दो और मैं खेती का चेहरा बदल दूंगा, पर तीन साल तक मुझसे यह मत पूछना कि मेरा क्या होगा’’ — उनके मन में गहरी तरह बैठ गई। इस संदेश ने उन्हें शहर की व्यस्तता छोड़कर खेत की ओर मोड़ने का साहस दिया और वे मानते हैं कि जिस दिन आप अपने बारे में सोचना बंद कर देते हैं, उसी दिन आप दूसरों के बारे में सोचना शुरू करते हैं।
किसानी की राह ने शुरुआती उत्साह के बाद गंभीर आर्थिक चुनौतियाँ पेश कीं। खेती के व्यापार में लगातार होने वाले खर्च, जमीन की देखभाल, बीज और सिंचाई के खर्च, मजदूरी तथा बाजार तक पहुँच की दिक्कतों ने उनकी बचत खतम कर दी और वे करीब दो करोड़ रुपये के कर्ज के बोझ तले दब गए। राजेश ने स्वीकार किया कि ऐसा दौर आया जब वे पारंपरिक आमदनी के साधन खो चुके थे और गुज़ारे के लिए भी मुश्किलें झेलनी पड़ीं; एक समय उन्होंने अपने बेटे के स्कूल के बाहर सब्ज़ियाँ बेचकर परिवार चलाने की बात बताई। दिवालियपन जैसा शब्द उन्होंने सीधे तौर पर शायद इस्तेमाल न किया, पर लंबे समय तक मन में उस तरह की अस्थिरता और चिंताओं का दबाव रहा।
फिर भी, उन्होंने अपनी उस यात्रा को विफलता नहीं माना। अपने अनुभवों के बारे में बातचीत में राजेश ने कहा कि उन्होंने कभी निराशा या गुस्सा में नहीं डूबे और अपने निर्णय पर टिके रहे। आध्यात्मिक संतुलन और धैर्य उनकी बातों में स्पष्ट दिखता है; वह कहते हैं कि यह सब उन्हें नये दृष्टिकोण और सिखने की प्रक्रिया से जोड़ता है। हालांकि उन्होंने कुछ फिल्मों में छोटे‑मोटे रोल निभाए — जिनमें 'सैयारा', 'है जवानी तो इश्क होना है', 'ओह माय डॉग' और 'निशांची' जैसी परियोजनाएँ शामिल हैं — पर उन्होंने पूर्णकालिक अभिनय में लौटने की कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की। उनका ध्यान फिलहाल खेती, सामुदायिक कार्य और आध्यात्मिक विमर्श पर अधिक दिखाई देता है।
मीडिया कवरेज और जनता की प्रतिक्रियाएँ मिश्रित रहीं। कुछ लोग उनकी निर्भीकता और आत्मिक खोज की सराहना करते हैं, वहीं कई ने सवाल भी उठाए कि क्या किसी मशहूर व्यक्ति को बिना ठोस व्यावसायिक योजना के इतनी बड़ी जीवनशैली बदलनी चाहिए। विशेषज्ञों ने जोर दिया कि आधुनिक कृषि में प्रेरणा के साथ-साथ तकनीकी ज्ञान, मार्केटिंग लिंक और वित्तीय प्रबंधन अनिवार्य हैं, और केवल आध्यात्मिक उत्प्रेरणा ही सतत सफलता की गारंटी नहीं है। राजेश के मामले में भी यही कमियाँ दिखाई दीं: प्रेरणा ने दिशा दी, पर व्यावहारिक योजना और संसाधनों के अभाव ने आर्थिक दवाब बढ़ा दिया।
