सुप्रीम कोर्ट ने बांद्रा के मशहूर बंगले 'मन्नत' में होने वाले रेनोवेशन पर रोक लगाने की याचिका को खारिज कर दिया है। यह याचिका समाजसेवी संतोष दौंडकर ने दायर की थी और उसमें महाराष्ट्र कोस्टल जोन मैनेजमेंट अथॉरिटी द्वारा दी गई कोस्टल रेगुलेशन जोन क्लीयरेंस को रद्द करने की मांग थी। तीन सदस्यीय बेंच — चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमल्य बागची और जस्टिस वी.एस. मोहना — ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि याचिका की मंशा और दावे स्पष्ट नहीं हैं और उन्हें उसकी सच्चाई पर संदेह है।
इससे पहले भी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, पुणे ने दौंडकर की अपील खारिज कर दी थी। महाराष्ट्र कोस्टल जोन मैनेजमेंट अथॉरिटी ने पहले ही शाहरुख खान को मन्नत में सुधार और निर्माण के लिए आवश्यक परमिशन दे दी थी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और संबंधित विभागों से मंजूरी मिलने के बाद भी सामाजिक कार्यकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अब उच्चतम न्यायालय ने किसी भी तरह की अंतरिम रोक लगाने की मांग नहीं मानी।
कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि जो तथ्य याचिका में पेश किए गए, वे ठोस नहीं दिखे और इसलिए तुरंत रोक लगाना उचित नहीं था। इस फैसले के बाद शाहरुख और गौरी खान के बंगले में चल रहे या प्रस्तावित रेनोवेशन का काम कानूनी अड़चन के बिना आगे बढ़ सकेगा। फैसले के बाद वहां होने वाले काम और आसपास के इलाके में सुरक्षा व निगरानी के बीच निर्माणकार्य सामान्य रूप से जारी रहने की संभावना है।
फैसला फिल्मी दुनिया के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि मन्नत एक लोकप्रिय स्थल है और यहां होने वाली हर कार्रवाई मीडिया और जनता की नज़र में रहती है।