डॉ. प्रकाश हिंदुस्तानी
यह किस्सा मेरे एक मित्र ने सुनाया जिनकी पहुँच अमिताभ बच्चन के घर के भीतर तक है --
“मैं कई बार अमिताभ बच्चन से मिल चुका था, लेकिन वह दिन कुछ अलग था। वे बहुत अच्छे मूड में थे। अचानक बोले - ‘आओ, तुम्हें अपनी लाइब्रेरी दिखाता हूँ।’
मेरे लिए यह सुनहरा मौका था। मैं उसे जाने नहीं देना चाहता था। मैंने उत्साह से कहा - वाह! माय प्लेज़र ! उनकी लाइब्रेरी देखना यानी उनके दिमाग और एकांत में प्रवेश करने जैसा अवसर था।
मैं उनके पीछे-पीछे चल पड़ा।
उनके घर के बारे में क्या ही बताऊँ? वहाँ कोई भी चीज साधारण नहीं थी। सब कुछ असाधारण ! लिविंग रूम में चित्रकार मंजीत बावा की बनाई हुई एक बहुचर्चित पेंटिंग 'बुल' लगी थी। उसके बारे में कहा जाता है कि उसकी कीमत करोड़ों रुपये है।
पूरा घर ऊँची मेहराबों, लकड़ी के पैनलों, पीतल और चाँदी की दुर्लभ एंटीक चीज़ों, पुरानी शैली की महंगी सजावट और भारी कालीनों से सजा हुआ था। घर के एक हिस्से में तंजावुर शैली की धार्मिक और सजावटी पेंटिंग्स थीं। महसूस हो रहा था कि यहाँ चीजें केवल सजावट नहीं हैं, हर वस्तु की अपनी कहानी है। लेकिन सच कहूँ तो मेरा ध्यान अब केवल एक जगह पर था -लाइब्रेरी।
और फिर हम वहाँ पहुँचे।
दरवाजा खुला।
सामने किताबें थीं।
इतनी किताबें कि पहली नजर में लगा जैसे किसी पुस्तकालय में आ गया हूँ। दीवार से दीवार तक अलमारियाँ। ऊपर तक जाती हुई कतारें। कुछ किताबें नई, कुछ पुरानी, कुछ बार-बार पढ़े जाने की गवाही देती हुईं।
कमरे में एक अजीब-सी शांति थी, वैसी, जैसी पुराने पुस्तकालयों में होती है।
दीवारों पर अमिताभ बच्चन और उनके परिवार की तस्वीरें थीं, साथ ही कुछ महंगी कलाकृतियाँ भी लगी हुई थीं। गुरु नानक देव जी की तस्वीर प्रमुखता से लगी थी (अमिताभ की माँ तेजी बच्चन जी सिख थीं)
लाइब्रेरी में ही अमिताभ बच्चन का स्टडी एरिया था। वहाँ उनके लिए एक ऊँची-सी गोल टेबल रखी थी। उस पर लेप टॉप खुला था। उन्होंने बताया कि उन्हें लिखने का काम खड़े होकर करना पसंद है, इसलिए उनकी टेबल सामान्य से काफी ऊँची बनवाई गई है।
अमिताभ बच्चन अपनी किताबों के बारे में बताने लगे। उन्होंने कहा कि यहाँ हरिवंश राय बच्चन की रचनाएँ, उनके हस्ताक्षर वाली पुस्तकें, कविता-संग्रह और आत्मकथाएँ विशेष स्थान पर रखी गई हैं - क्या भूलूँ क्या याद करूँ, नीड़ का निर्माण फिर, बसेरे से दूर, दशद्वार से सोपान तक आदि।
इसके अलावा उनकी लाइब्रेरी में फिल्म और अभिनय से जुड़ी किताबें, भारतीय इतिहास और संस्कृति पर आधारित पुस्तकें तथा आध्यात्मिक और धार्मिक साहित्य भी अलग-अलग अलमारियों में रखा हुआ था।
अमिताभ बच्चन ने यह भी बताया कि उन्होंने महाभारत के कई संस्करण मँगवाए थे, लेकिन बाद में मित्रों की सलाह पर उन्हें एक लाइब्रेरी को दान कर दिया, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि घर में महाभारत नहीं रखनी चाहिए।
अमिताभ बच्चन ने बताया कि उनकी लाइब्रेरी में उनकी अपनी पसंद से चुनी हुई दस हजार से अधिक किताबें हैं।
मेरा मित्र उनकी किताबों से और उनकी बातों से बहुत प्रभावित हुआ। उसने जिज्ञासा से पूछा -
‘इन किताबों में से अधिकांश तो आप पढ़ चुके होंगे?’
अमिताभ बच्चन मुस्कुराए और बोले - ‘नहीं, अभी कहाँ! मेरे पास इतनी किताबें पढ़ने का समय नहीं है। पढ़ना जरूर चाहता हूँ।’
मित्र ने फिर पूछा - ‘तो फिर आप इन सारी किताबों को कब पढ़ पाएँगे?’
अमिताभ बच्चन ने मासूमियत से जवाब दिया -- ‘जब मैं रिटायर हो जाऊँगा, तब इन्हें पढ़ूँगा।’
लाइब्रेरी की सीढ़ियों से उतरते समय मेरा मित्र कुछ कहना चाहता था, पर अमिताभ के डर से बोल नहीं पाया।
उसने कहा कि मैं यह सोच रहा था कि अमिताभ बच्चन अभी 11 अक्टूबर को 84 वर्ष के होकर 85वें वर्ष में प्रवेश करेंगे, लेकिन आज भी इतने व्यस्त हैं कि किताबें पढ़ने का समय नहीं निकाल पाते।
.... शायद वे अपनी सेंचुरी पूरी करने के बाद रिटायर होंगे और तब जाकर ये किताबें पढ़ पाएँगे!
हम सब ऐसे ही हैं जो सोचते हैं कि रिटायर होकर किताबें पढ़ेंगे, दुनिया घूमेंगे, परिवार के साथ वक्त बिताएंगे और इसी उम्मीद में जीये जाते हैं, काम करते ही जाते हैं और फिर एक दिन......