हिमांशु राज़
लोकप्रिय गीत निर्देशक रिदम सनाध्या, जिन्होंने शाहिद माल्या,जुबिन नौटियाल और असिस कौर जैसे गायकों के साथ काम किया है तथा कपिल शर्मा की फिल्म 'किस किसको प्यार करूं 2' का गीत 'हर सफर में' निर्देशित किया है, अपनी मां से बेहद करीबी रिश्ता साझा करती हैं। वे अपनी मां को आशीर्वाद मानती हैं और उनके प्रोत्साहन व समर्थन के लिए कृतज्ञ हैं।
मातृ दिवस (10 मई) के अवसर पर उन्होंने कहा, "वह एकमात्र व्यक्ति हैं जो मेरे गहरे विचारों और भावनाओं को पूरी तरह समझती हैं। भले ही मैं अपनी भावनाएं छिपाने की कोशिश करूं, वे अपनी अंतर्ज्ञान से महसूस कर लेती हैं। मेरी मां मेरी जिंदगी में दवा और आशीर्वाद दोनों हैं। मेरे लिए वे भगवान का स्वरूप हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "मेरी मां बेहद सक्रिय महिला हैं। मैंने उन्हें कभी खाली बैठे नहीं देखा। वे हमेशा नई चीजें सीखती रहती हैं और उनका व्यक्तित्व गतिशील है। वे अत्यंत दयालु हैं तथा अपनों ही नहीं, अनजान लोगों की भी मदद के लिए तत्पर रहती हैं। बिना किसी अपेक्षा के दूसरों का सहारा बनती हैं। मुझे गर्व है कि वे न केवल मेरी, बल्कि कई लोगों की मां समान हैं।"
रिदम के लिए हर दिन मां का है। उन्होंने कहा, "वे असंख्य तरीकों से दिन को संवारती हैं। यह भावना सार्वभौमिक है। मातृ दिवस तो मात्र औपचारिक सम्मान है, पर मां का निःस्वार्थ प्रेम, देखभाल व त्याग हर पल सराहा जाना चाहिए।"
बचपन की गर्मियों की एक याद उन्हें खास लगती है। "स्कूल से गर्मी में लौटने पर मां का इंतजार करना कितना सुकून भरा था। वे मुझे और बहन को अपने हाथों राजमा चावल खिलातीं। उनके चूड़ियों की खनक, मुस्कान और तृप्ति का भाव आज भी याद है।"
मां के व्यवसाय को संभालते हुए भी बच्चों की उपेक्षा न करने से रिदम ने उनके बलिदान समझे। "वे सशक्त नारी का प्रतीक हैं, जो काम, परिवार व समाज का संतुलन बनाए रखती हैं। पिता के साथ प्रेमपूर्ण रिश्ता और परिवार से मजबूत बंधन बनाए रखना सीखने योग्य है। व्यवसाय में उतार-चढ़ाव झेलने के बावजूद उनकी हिम्मत और कभी न हार मानने की भावना आज भी प्रेरित करती है। किशोरावस्था में उन्होंने व्यवसाय त्यागकर हमारी दोस्त बनीं।"
रिदम ने कहा, "काश मैं अपनी कृतज्ञता और सम्मान अधिक व्यक्त कर पाती। वे असाधारण महिला हैं, जिनके हृदय में सभी के लिए अपार प्रेम है।" वे मां को 'देवी' और जीवन का ध्रुव तारा मानती हैं। "वे शक्ति, स्नेह व बुद्धि से हमें मार्गदर्शित करती हैं। बस यही चाहती हूं कि वे हमेशा वैसी ही रहें, क्योंकि उनकी मौजूदगी से दुनिया रोशन हो जाती है।"