पाकिस्तान में एक बार फिर अभिव्यक्ति की सीमाएं लांघते हुए 71 साल की प्रसिद्ध भरतनाट्यम नृत्यांगना और सामाजिक कार्यकर्ता सीमा किरमानी को सिंध पुलिस द्वारा गिरफ्तार करने का दावा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि बिंदी लगाए, सफेद साड़ी में पहनी पुरानी उम्र की यह महिला को बुर्कानशी पुलिसकर्मी घसीटते हुए कार में खींचकर ले जा रही हैं, जिसने पड़ोसी देश की महिलाओं के अधिकार, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और सांस्कृतिक स्वतंत्रता पर नया विवाद खड़ा कर दिया है।
सीमा किरमानी पाकिस्तान की जानी‑मानी भरतनाट्यम, ओडिसी, कथक और कथकली जैसे भारतीय शास्त्रीय नृत्यों की प्रवक्ता मानी जाती हैं, जिन्होंने दशकों से नौटंग, थिएटर और लेखन के जरिए महिलाओं की आजादी, अल्पसंख्यकों के अधिकार और सामाजिक समानता जैसे मुद्दों पर खुलकर आवाज उठाई है। उनके द्वारा चलाए जा रहे संगठन “तहरीक‑ए‑निस्वां” को उदारवादी और फेमिनिस्ट तबके में खास मान्यता मिलती है, लेकिन दूसरी ओर कट्टरपंथी वर्ग समय‑समय पर उनके नृत्य और विचारों पर “इस्लामी मूल्यों के विरुद्ध” होने का आरोप लगाता रहा है।
बताया जा रहा है कि कराची प्रेस क्लब में आयोजित किसी कार्यक्रम में शामिल होने जा रही सीमा को रास्ते में ही रोककर पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। वीडियो में उन्हें घसीटा जा रहा है, जिसके बाद उन्हें कार में बैठाकर ले जाया जाता दिखता है। इस घटना के बाद पाकिस्तान के अलग‑अलग बुद्धिजीवी, कलाकारों, मानवाधिकार संगठनों और विदेशी मीडिया में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है, जो इसे सांस्कृतिक विविधता पर हमला और अभिव्यक्ति की आजादी का दमन बता रहे हैं।
सीमा की गिरफ्तारी ने पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों – चाहे हिंदू हों, सिख हों, या अहमदिया – की सामान्य सुरक्षा और स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए हैं, जहां इन समुदायों की लंबे समय से भेदभाव और असुरक्षा की शिकायतें रही हैं। अब एक वरिष्ठ हिंदू कलाकार की इस तरह की हिरासत ने देश के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह बहस और तीखी कर दी है कि आखिर वहां की सांस्कृतिक हकीकत और नागरिक स्वतंत्रता की सीमाएं कहां तक टूट चुकी हैं।