बॉलीवुड में इन दिनों फिल्मों की बढ़ती लागत और सितारों की महंगी मांगों को लेकर बहस तेज है। अनुभवी निर्माता केसी बोकाडिया ने हाल ही में उन कलाकारों पर सवाल उठाए हैं, जो मोटी फीस लेने के बावजूद अपनी पूरी टीम का खर्च भी प्रोड्यूसर से उठाने की उम्मीद रखते हैं। उनका कहना है कि आज कई बड़े सितारे अपने साथ मेकअप आर्टिस्ट, हेयर स्टाइलिस्ट, मैनेजर, ड्राइवर, ट्रेनर और दूसरे स्टाफ को लेकर चलते हैं, और इन सभी का खर्च फिल्म के निर्माता को देना पड़ता है। यही वजह है कि फिल्म का बजट जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है और छोटे निर्माताओं पर दबाव कई गुना बढ़ जाता है।
बोकाडिया ने इस संदर्भ में अमिताभ बच्चन की मिसाल दी। उनके मुताबिक, अमिताभ बच्चन हमेशा अपने पर्सनल स्टाफ का खर्च खुद उठाते हैं। वे किसी प्रोड्यूसर पर अपने स्पॉट बॉय, मेकअप मैन, ड्राइवर या अन्य कर्मचारियों का बोझ नहीं डालते। इतना ही नहीं, वे अपनी वैनिटी वैन और ड्राइवर भी खुद साथ लेकर आते हैं। बोकाडिया ने इसे एक अनुशासित और प्रोफेशनल रवैया बताया, जो आज के दौर में दुर्लभ होता जा रहा है।
फिल्म उद्योग के जानकारों का मानना है कि स्टार फीस, पर्सनल स्टाफ के खर्च और भव्य सेटअप की वजह से प्रोजेक्ट की लागत तेजी से बढ़ रही है। कई बार फिल्म का बड़ा हिस्सा सिर्फ एक या दो सितारों की मांगों में चला जाता है, जबकि तकनीकी टीम, मार्केटिंग और पोस्ट-प्रोडक्शन के लिए अपेक्षित बजट कम पड़ जाता है। ऐसे हालात में निर्माता का जोखिम बढ़ता है और फिल्म की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है।
बोकाडिया की टिप्पणी दरअसल एक बड़े सवाल को सामने लाती है कि क्या बॉलीवुड को अब खर्च और जिम्मेदारी के नए संतुलन की जरूरत है। जब तक स्टारडम के साथ अनुशासन और संवेदनशीलता नहीं जुड़ती, तब तक फिल्म निर्माण की लागत पर लगाम लगाना मुश्किल रहेगा।