"तू या कोई नहीं" में काम करते घर जैसा जुड़ाव महसूस हुआ -ऋषभ जायसवाल

24 जून 2026
"तू या कोई नहीं" में काम करते घर जैसा जुड़ाव महसूस हुआ -ऋषभ जायसवाल

जब कोई काम घर जैसा लगे, तो वह सिर्फ नौकरी नहीं रह जाता — दिल का हिस्सा बन जाता है। ऋषभ जायसवाल के लिए "तू या कोई नहीं" कुछ ऐसा ही है। जब उन्हें पता चला कि इशिका शाही यह रचना बना रही हैं, तो उनका उत्साह तुरंत जागा। वे इशिका की पिछली रचना "जब राशि मिली" से जुड़े रहे हैं और राजन साहब को पिता जैसा मानते हैं, इसलिए यह परियोजना उनके लिए व्यक्तिगत महत्व रखती है।
इशिका और अरुण जी ने कहानी सुनाई तो ऋषभ दोनों उत्साहित और थोड़ा हैरान भी हुए। उन्होंने सोचा कि क्या यह भूमिका उनके लिए ठीक रहेगी, क्योंकि यह अब तक निभाए गए किरदारों से अलग थी। पर निर्माताओं के भरोसे ने उन्हें इसे स्वीकार करने के लिए प्रेरित किया। आयुष का किरदार ऋषभ के अनुसार एक सच्चा मित्र है — सख्त भी और संवेदनशील भी। वह अपने मित्र की रक्षा करने की प्रवृत्ति रखता है और उसमें थोड़ी खुरदरापन भी है, जो उसे रोचक बनाती है।
कहानी प्यार और भावनाओं के आसपास घूमती है, पर इसमें द्वैध स्वरूप का तत्व भी है, जिससे कथा में उलझन और रुचि दोनों बढ़ती हैं। दूरदर्शन जैसी पारंपरिक पृष्ठभूमि छोड़कर यह नया प्रारूप ऋषभ को ताज़ा लगा; यहाँ अभिनय अधिक स्वाभाविक और भावनाएँ असली महसूस होती हैं।
एक दृश्य खास चुनौतिपूर्ण था — खलनायक से भागते हुए नायक द्वारा नायिका की रक्षा करते हुए गाड़ी तक पहुँचने का क्रम, जिसका अंत बहुत तीव्र था और जिसने उन्हें परखा। ऑन‑स्क्रीन कलाकारों की सहजता ने कैमरे पर उनका रिश्ता भरोसेमंद दिखाया।
ऋषभ दर्शकों से कहते हैं कि यह शृंखला खुले मन से देखें। अलग तरह की कहानी, मजबूत पात्र और सरल अभिनय निश्चित रूप से दर्शकों को बांधे रखेंगे।