मुम्बई एयरपोर्ट पर डिजाइनर‑उद्यमी मसाबा गुप्ता को एक साधारण टी‑शर्ट में देखा गया, जिस पर बड़े अक्षरों में लिखा था "थक गई"। आमतौर पर सेलिब्रिटी के एयरपोर्ट लुक महंगे ब्रांड और स्टाइल के लिए चर्चा में रहते हैं, पर मसाबा की यह चोइस सीधे लोगों की रोजमर्रा की थकान की आवाज़ बन गई। मसाबा सिर्फ एक फैशन डिजाइनर नहीं हैं; वे ब्रांड चलाती हैं, कंटेंट बनाती हैं, किताब लिख चुकी हैं, अभिनय कर चुकी हैं और हाल‑फिलहाल माँ बनकर नए अनुभवों से गुजर रही हैं। काम, मिलन‑जुलन, पब्लिक अपियरेंस और मातृत्व—इन सब का संतुलन कोई आसान काम नहीं। इसलिए "थक गई" का संदेश किसी ग्लैमरस स्टेटमेंट से ज्यादा, एक ईमानदार मानवीय अनुभूति लग रहा था।
थकान के बावजूद मसाबा अपनी शैली और पहचान नहीं खोतीं। उनका करियर लगातार बदलने और नया करने का रहा है—रचनात्मकता और बिज़नेस दोनों को साथ लेकर चलना उनकी खासियत है। सादे कपड़े और सीधे शब्दों ने यह दिखा दिया कि फैशन केवल दिखावे का नहीं, भावनाओं का भी जरिया हो सकता है।"थक गई" ने एक हल्की मुस्कान भी दी और एक सच्ची बात भी कही—कि सफलता के साथ थकान भी आती है, और उसे स्वीकार करना भी एक हकीकत है।