बॉलीवुड की दीया मिर्जा ने हाल ही में अपने शुरुआती दिनों की कुछ यादें साझा कीं, जिनमें लंबे और थका देने वाले शूटिंग शेड्यूल के साथ-साथ उनसे जुड़े अनुभव भी शामिल थे। उन्होंने बताया कि डेब्यू के बाद भी कितनी बार उन्हें 27-28 घंटे बिना रुके काम करना पड़ा और कई बार तो स्क्रिप्ट भी पूरा नहीं मिल पाती थी। दीया ने कहा कि उनके समय में प्रोडक्शन हाउस्स—खासकर पूजा एंटरटेनमेंट—कठोर मेहनत के माहौल के लिए जाने जाते थे। "एक बार पूजा फिल्म्स के साथ काम कर लिया, तो आप किसी भी तरह के प्रोडक्शन के साथ काम करने के लिए तैयार हो जाते हो," उन्होंने याद करते हुए कहा। कई बार उन्हें सिर्फ फिल्म के आइडिया बताकर कहा जाता था कि यह सुपरहिट होगी, बस कर लो। तब स्क्रिप्ट या आराम का थोड़ा भी भरोसा नहीं रहता था।
हालिया मुलाकात में फिल्ममेकर और कोरियोग्राफर फराह खान दीया के घर गईं। इस दौरान फराह ने दीया के परफॉर्मेंस की तारीफ की और कहा कि पर्दे पर दीया कभी भी किसी न्यूकमर जैसी नहीं लगीं। फराह ने दीया के उन गीतों—'रहना है तेरे दिल में' और 'तुमको ना भूल पाएंगे'—में उनकी परफॉर्मेंस की तारीफ की। दीया ने बताया कि फराह ने उन्हें हमेशा आत्मविश्वास से भरपूर देखा और उनकी तारीफों ने उन्हें प्रेरित किया।
दीया ने यह भी बताया कि शुरुआत में उनके पास ट्रेनिंग या विशेष संसाधन नहीं थे। उन्होंने फराह का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि फराह ने उन नए कलाकारों के लिए कई तरह की सुविधाएँ और ट्रेनिंग की व्यवस्था करवाई—वर्कशॉप, एक्टिंग क्लास, डांस क्लास और एटीक्वेट सिखाने जैसी चीजें। दीया ने कहा कि जब वह उन कलाकारों के बारे में सुनती थीं जिन्हें फराह ने लॉन्च किया, तो उन्हें फराह की केयर और मेहनत की कहानियाँ बहुत प्रेरणादायक लगती थीं।
दीया ने अपने करियर की शुरुआत 2001 में रोमांटिक ड्रामा 'रहना है तेरे दिल में' से की थी। फिल्म ने शुरुआती दिनों में बॉक्स ऑफिस पर ज़बरदस्त सफलता नहीं पाई, लेकिन समय के साथ इसे कल्ट फिल्म का दर्जा मिल गया। दीया ने उसके बाद भी कई परियोजनाओं पर काम किया, जिनमें से कुछ ने दर्शकों तक वह असर नहीं छोड़ा जो उम्मीद की जाती है।
वर्तमान में दीया अपनी आने वाली फिल्म 'इक्का' की रिलीज का इंतजार कर रही हैं। यह फिल्म सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा के निर्देशन में बनी है और इसमें सनी देओल व अक्षय खन्ना भी प्रमुख भूमिकाओं में दिखेंगे। दीया की हालिया यादों ने यह बात फिर से स्पष्ट की है कि पुराने समय में अभिनेता किस तरह की चुनौतियों और कठोर मेहनत से गुजरते थे—कभी-कभी बिना स्क्रिप्ट और लगातार लंबे घंटों तक काम करते हुए।