अभिनेत्री और समाजसेवी सोमी अली ने वर्ल्ड म्यूजिक डे पर कहा कि संगीत ने उनके जीवन में केवल मनोरंजन का काम नहीं किया, बल्कि वह उनका सहारा बन गया। जब शब्द समाप्त हो गए और दर्द बर्दाश्त नहीं होता था, तब संगीत ने उनके दर्द को संभाला और जीने की उम्मीद दी।
सोमी कहती हैं कि उनका संगीत स्वाद दो दिशाओं में बंटा हुआ है — अमेरिकी रॉक की कच्ची ताकत और पुराने बॉलीवुड की भावनात्मक गहराई। "बोन जोवी की ऊर्जा मुझे संघर्ष के लिए हौसला देती है, जबकि राजेश खन्ना के गीत मेरी आत्मा के नाजुक हिस्सों को छू लेते हैं। एक मुझे खड़ा होने की हिम्मत देता है, दूसरा मुझे महसूस करने की इजाजत।"
जब किसी एक गीत की बात हुई, तो उन्होंने बोन जोवी के "लिवीन ऑन अ प्रेयर" को चुना। उनके अनुसार यह गीत कठिन रातों में उम्मीद जगाता रहा और बताता है कि चलते रहने पर कुछ बदलता है। वहीं पुराने बॉलीवुड के गीत विशेषकर राजेश खन्ना और किशोर कुमार की आवाज़ ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया।
सोमी ने राजेश खन्ना की पंक्तियाँ "ज़िंदगी का सफर है ये कैसा सफर…" उद्धृत करते हुए कहा कि यह गीत भविष्यवाणी जैसा लगता है — चमक के बावजूद जीवन में अकेलापन और कठिनाइयाँ आ सकती हैं। उनके अनुभव में यह गीत लोगों को जीवन की अनिश्चितता स्वीकारने और शालीनता से आगे बढ़ने की सीख देता है।
आज भी उनकी प्लेलिस्ट में "ज़िंदगी का सफर" और "लिवीन ऑन अ प्रेयर" बार-बार आते हैं — एक शांति देता है, दूसरा हिम्मत। सोमी के लिए संगीत सिर्फ धुन नहीं, जीने का जरिया रहा है। सोमी यह भी बताती हैं कि संगीत ने उन्हें टूटने के बाद भी खड़ा होने की ताकत दी। वे संगीत के माध्यम से अपने दर्द को बाहर निकालती हैं और धीरे-धीरे ठीक होती हैं। उनके कहने में, जब कोई आदमी टूट जाए तो संगीत ही उसका सबसे बड़ा साथी बन जाता है।